शहर ही खन्ना कॉलोनी स्थित अस्पताल में शुक्रवार शाम को प्रसव के बाद एक महिला की मौत हो गई। महिला को सुबह अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां दोपहर को उसने बच्ची को जन्म दिया था। महिला की मौत के बाद बिफरे परिजनों ने अस्पताल में जमकर रोष जताया। बाद में उन्होंने बावा-तराना रोड पर जाम लगा दिया। परिजन चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगा रहे थे। सेक्टर-27 व सिविल लाइन थाना प्रभारियों ने परिजनों को समझाकर जाम खुलवाया। बाद में मौके पर पहुंचे मेयर ने निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन देकर उन्हें शांत किया। पुलिस ने लापरवाही का मुकदमा दर्ज कर लिया है।
शहर के सेक्टर-12 की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के रहने वाले प्रिंस कुमार की पत्नी दीपाली (26) को शुक्रवार सुबह प्रसव के लिए खन्ना कॉलोनी स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना था कि दीपाली का छह महीने से इसी अस्पताल में ही उपचार चल रहा था। दोपहर में दीपाली ने बच्ची को जन्म दिया। उसके कुछ देर बाद ही उसकी हालत बिगड़ने लगी। उसे रक्तस्राव हो गया। चिकित्सकों ने तत्काल दो यूनिट ब्लड लाने के लिए उन्हें एक निजी अस्पताल में भेज दिया। वहां पर उनको केवल एक यूनिट रक्त ही मिल सका। उसके बाद परिजनों को सामान्य अस्पताल में भेजा गया। उनको पांच यूनिट ब्लड लाने को कहा गया। परिजनों का कहना है कि जब तक वे ब्लड लेकर आए दीपाली की मौत हो गई थी। उनका कहना था कि इस मामले में अस्पताल की तरफ से लापरवाही की गई।
परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने अस्पताल के सामने बावा-तराना रोड पर जाम लगा दिया। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने उनको समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे चिकित्सकों की गिरफ्तारी पर अड़ गए। सेक्टर-27 थाना प्रभारी इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार व सिविल लाइन थाना प्रभारी नीरज कुमार ने परिजनों को समझाकर जाम खुलवा दिया। उसके बाद भी परिजन मुकदमा दर्ज कर चिकित्सकों की गिरफ्तारी पर अड़े रहे। इस दौरान डीएसपी हंसराज भी मौके पर पहुंचे और ठोस कार्रवाई का आश्वासन दिया। उनके बाद मेयर निखिल मदान वहां आए। उन्होंने लोगों को निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा देकर शांत कराया। दीपाली की ननद ललिता ने पुलिस को शिकायत दी, जिस पर पुलिस ने प्रबंधन के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा दर्ज कर लिया है।
ब्लड स्लिप पर नहीं लगाई मुहर
दीपाली के भाई जयसिंह अरोड़ा ने बताया कि पहली बार में उनको केवल स्लिप देकर भेज दिया गया, ब्लड का सैंपल नहीं दिया गया। वह सामान्य अस्पताल से वापस आए तो सैंपल दे दिया, लेकिन स्लिप पर मुहर नहीं लगाई। वह मुहर लगवाने के लिए आए तो फार्म पूरा नहीं भरा गया। इस तरह उनको कई चक्कर लगाने पड़े।
अस्पताल प्रबंधन ने फोन कर बुलाई पुलिस
दीपाली की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने ही फोन कर पुलिस को बुलाया। अस्पताल से डायल-112 टीम को कॉल की। इससे परेशान परिजनों ने हंगामा किया। उन्होंने हंगामा शुरू करने के साथ ही रोड जाम की। करीब 45 मिनट तक लोग सड़क पर डटे रहे।
चिकित्सकों ने किया हरसंभव प्रयास, नहीं हुई लापरवाही
अस्पताल के प्रभारी चिकित्सक डॉ. अतुल ने बताया कि महिला की हालत बेहद गंभीर थी। परिजनों को चार दिन पहले ही बता दिया गया था। परिजनों को फ्रेश ब्लड लेकर आने को कहा गया था। अस्पताल से ब्लड लाने के लिए भेजा गया था। फोन भी किया गया था। महिला के गर्भ में काफी पानी था। उसके साथ ही अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। अस्पताल में चार चिकित्सकों ने घंटों तक महिला को बचाने का प्रयास किया है। अस्पताल की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही नहीं की गई है।
वर्जन
अस्पताल में महिला की प्रसव के बाद मौत होने और परिजनों के जाम लगाने की सूचना मिली थी, जिस पर मौके पर पहुंचकर जाम खुलवाया गया। मृतक महिला की ननद के बयान पर लापरवाही का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट व जांच के आधार पर ठोस कार्रवाई की जाएगी।
- इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार, थाना प्रभारी, सेक्टर-27
जाम लगाकर खड़े लोगों को समझाते मेयर निखिल मदान व पुलिसकर्मी। संवाद- फोटो : Sonipat
दीपाली। फाइल फोटो- फोटो : Sonipat