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पैसे नहीं देने पर निजी अस्पताल ने शव देने से किया इनकार

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चालक की मौत के बाद चुकाए गए बिल को दिखाते परिजन। संवाद - फोटो : Sonipat
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सोनीपत। सड़क हादसे में घायल युवक की शहर के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। अस्पताल प्रबंधन ने बिल भुगतान होने तक शव देने से इनकार कर दिया। इस पर परिजनों और रिश्तेदारों ने एकत्रित होकर अस्पताल का बिल 30 हजार रुपये चुकाया। अस्पताल प्रबंधन ने पांच घंटे बाद शव परिजनों को ले जाने दिया।
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बिजेंद्र सिंह ने बताया कि उनका भांजा रणबीर सिंह (43) मुंगेर जिले के गांव हवेली खड़कपुर का रहने वाला था। वह परिवार के साथ दिल्ली के रमेश नगर में रहता था। रणबीर सिंह की बुजुर्ग मां परी भी उसके साथ में रहती थी। रणबीर के बड़े भाई की कुछ साल पहले मौत हो गई थी। ऐसे में परिवार का भरण-पोषण अकेले उसके ऊपर ही था। वह टैंपो चलाकर परिवार की गुजर-बसर करता था। बुधवार रात को वह टैंपो में सामान लेकर केजीपी (कुंडली-गाजियाबाद-पलवल) एक्सप्रेस वे से आ रहा था। इस दौरान टायर फट जाने से उसका टैंपो केजीपी पर पलट गया। इससे टैंपो चला रहा रणबीर सिंह और उसका सहायक दिग्विजय सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को जिला नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां से चिकित्सकों ने रणबीर सिंह को पीजीआई रेफर कर दिया। हालत गंभीर होने पर रणबीर को परिजनों ने बहालगढ़ रोड स्थित निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। वहां पर वीरवार तड़के रणबीर की मौत हो गई।
परिजन दिग्विजय सिंह ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन ने उनसे 30 हजार रुपये की मांग की। उस समय इतने रुपये नहीं थे। रुपये का इंतजाम करने के लिए रिश्तेदारों को भेजा था। अस्पताल में चिकित्सकों से गुहार लगाई कि वह शव को दे दें, जिससे पोस्टमार्टम हो सके। उनके दो रिश्तेदार अस्पताल में ही रहेंगे। बिल का भुगतान कुछ देर में हो जाने पर ही वह अस्पताल से जाएंगे।
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परिजनों व रिश्तेदारों ने एकत्रित होकर जुटाई राशि
चिकित्सकों ने बिल भुगतान होने तक शव देने से स्पष्ट इनकार कर दिया। करीब पांच घंटे तक शव अस्पताल में ही पड़ा रहा। रणबीर सिंह के परिजनों व रिश्तेदारों ने आपस में एकत्र करके 30 हजार रुपये का इंतजाम किया। उसके बाद ही शव परिजनों को मिल सका। कुंडली थाना पुलिस ने वीरवार दोपहर बाद पोस्टमार्टम कराकर शव उसके परिजनों को सौंप दिया।
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