बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज की ओर से थैलेसीमिया के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। इस बीमारी के मरीज अब मेडिकल कॉलेज में ही इलाज करा सकेंगे। इसके लिए उन्हें रोहतक पीजीआई व दिल्ली के अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। जल्द ही ऐसे मरीजों का मेडिकल कॉलेज में इलाज हो सकेगा। थैलेसीमिया के मरीजों का इलाज शुरू करने के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मशीनें स्थापित करने के लिए मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार थैलेसीमिया अनुवांशिक रोग है, जो बच्चों को माता-पिता के जरिये लग जाता है। इसमें शरीर की हीमोग्लोबिन निर्माण की प्रक्रिया में गड़बड़ी हो जाती है, जिससे रक्तक्षीणता के लक्षण प्रकट होते हैं। इसकी पहचान बच्चे में तीन माह की आयु के बाद ही होती है। इसमें रोगी बच्चे के शरीर में रक्त की भारी कमी होने लगती है, जिससे उसे बार-बार बाहरी खून चढ़ाने की आवश्यकता होती है। इस बीमारी के इलाज की सुविधा अभी तक बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज में नहीं थी। ऐसे में जिले व आसपास के मरीजों को इलाज कराने के लिए या तो रोहतक पीजीआई या फिर दिल्ली के अस्पतालों में जाना पड़ता है। इससे मरीजों के साथ ही उनके तीमारदारों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। इसी के मद्देनजर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने थैलेसीमिया के मरीजों का यहीं पर इलाज शुरू कराने की योजना बनाई है।
अलग से होगा वार्ड स्थापित, सभी मशीनों की सुविधा होगी
मेडिकल कालेज में थैलेसीमिया के मरीजों का इलाज करने के लिए अलग से वार्ड स्थापित किया जाएगा। इस वार्ड में सभी मशीनों की सुविधा होगी। इसके लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने स्थानीय अस्पताल में वार्ड स्थापित करने की प्रक्रिया के साथ ही मशीनों को लेकर प्रस्ताव बनाया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने यह प्रस्ताव मुख्यालय भेजा है। मुख्यालय से मंजूरी मिलते ही यहां मशीनों को स्थापित किया जाएगा, ताकि मरीजों का इलाज जल्द शुरू किया जा सके।
वर्जन
मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में थैलेसीमिया के मरीजों का इलाज शुरू करने की योजना बनाई। इसके लिए मशीनें स्थापित होंगी, जिसका प्रस्ताव मुख्यालय भेज दिया गया है। इसके साथ ही अन्य प्रक्रिया भी मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अपने स्तर पर शुरू कर दी है। मशीनों की मुख्यालय से मंजूरी मिलते ही उन्हें स्थापित करवा मरीजों का इलाज शुरू करवा दिया जाएगा। इसके बाद उन्हें दूर-दराज के क्षेत्र में इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा।
- डॉ. राजीव महेंद्रु, निदेशक, बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज, खानपुर कलां।