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Sonipat: लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए नरेंद्र भूटानी ने छेड़ी मुहिम, अब तक 2398 का कर चुके अंतिम संस्कार

Mon, 27 Jun 2022 01:32 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)

सार

नरेंद्र ने सेक्टर-15 के शमशान घाट में कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों का नगर निगम कर्मियों संग मिलकर अंतिम संस्कार कराया। वर्ष 2004 में शमशान घाट के अंदर शेड निर्माण के बाद अभियान शुरू किया था।
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लावारिस शवों की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने से पूर्व पूजा-अर्चना करते नरेंद्र भुटानी। सा? - फोटो : Sonipat
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विस्तार
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आज के बदलते दौर में जहां लोग रिश्तों को भूलते जा रहे हैं, वहीं एक शख्स ऐसे भी हैं जो लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करवाने के साथ ही अस्थियों को गंगा में प्रवाहित कर रहे हैं। यह शख्स हैं सेक्टर-14 निवासी नरेंद्र भुटानी, जो नि:स्वार्थ भाव से लावारिस शवों की मुक्ति के लिए 18 सालों से अंतिम संस्कार करवाने के बाद अस्थियों को हरिद्वार में गंगा में प्रवाहित करते हैं। इसके बाद हवन कर भंडारा लगाते हैं। नरेंद्र भुटानी अब तक करीब 2398 अस्थियों को गंगा में प्रवाहित कर चुके हैं। यही नहीं किसी के अंधियारे जीवन में उजाला करने के लिए नेत्रदान करने के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं।

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नरेंद्र भुटानी ने लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए मुहिम चलाई हुई है। लावारिस शव की सूचना मिलते ही वे वहां शव वाहन लेकर पहुंच जाते हैं और उसके अंतिम संस्कार का पूरा प्रबंध करते हैं। इतना ही नहीं वे शव के अंतिम संस्कार के बाद उसकी अस्थियां भी संभालकर रखते हैं और वर्ष में एकत्रित होने वाली अस्थियों को जुलाई माह में एक साथ हरिद्वार ले जाकर गंगा में प्रवाहित करते हैं। उनके साथ प्रवीन वर्मा व सतीश बाल्याण भी इस कार्य में सहयोग करते हैं।

भुटानी बताते हैं डेढ़ साल से सेफ इंडिया फाउंडेशन भी इस मुहिम में अपना सहयोग दे रही है। फाउंडेशन से संजय सिंगला व वाईके त्यागी लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करवाते हैं। नरेंद्र भुटानी बताते हैं वे हर महीने इन अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने के लिए हरिद्वार ले जाते हैं और पूजा-अर्चना कर अस्थियां प्रवाहित करते हैं।
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शमशान घाट के निर्माण से शुरू हुआ सफर
वर्ष 2004 में नरेंद्र भुटानी एक परिचित के अंतिम संस्कार के लिए शमशान घाट गए थे। इसी दौरान अचानक बारिश शुरू हो गई। बारिश के कारण परिचित के अंतिम संस्कार में काफी परेशानी हुई। इस दौरान उन्होंने ठान लिया कि वे इस समस्या से लोगों को निजात दिलाएंगे। इसे लेकर उन्होंने मुक्तिधाम बनवाया। मुक्तिधाम बनाने के बाद उन्होंने लावारिस शवों के अंतिम संस्कार का बीड़ा उठाया। जहां भी लावारिस शव की सूचना मिलती है, वहां स्वयं जाकर पुलिस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को उठाकर शमशान घाट लाते हैं और उसका अंतिम संस्कार करते हैं। नरेंद्र भुटानी बताते हैं कि बहुत से लोग ऐसे हैं जो आर्थिक कमजोरी के कारण अपनों का अंतिम संस्कार तक नहीं कर पाते, ऐसे लोगों की मदद कर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को पूरा करवाते हैं।

लॉकर में रखी जाती हैं अस्थियां
नरेंद्र भुटानी ने बताया कि शिव मुक्ति धाम में अस्थियां रखने के लिए लॉकर बनाए हैं। लावारिस शवों को उठाकर शमशाम घाट तक लाने के लिए दृष्टि सेवा समिति के तीन वाहन हैं। साथ ही 10 शव चैंबर भी हैं। अंतिम संस्कार के बाद अस्थियों को लॉकर में रख दिया जाता है। हर साल जुलाई माह में सभी अस्थियों को गंगाजल व दूध से धोकर कट्टे में डालकर हरिद्वार ले जाते हैं, जहां पूर्जा-अर्चना कर विधि-विधान से उनको प्रवाहित करते हैं। गंगा मैया से प्रार्थना करते हैं कि हमें नहीं पता ये अस्थियां किसकी हैं, इन्हें अपने चरणों में स्थान दें और परिवार को दुख सहने की शक्ति प्रदान करें। नरेंद्र भुटानी कहते हैं कि जब तक सांसे चलती रहेंगी, तब तक अपनी टीम के साथ लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने और अस्थियां गंगा में प्रवाहित करने का कार्य करते रहेंगे।

2180 का करवा चुके हैं नेत्रदान
शवों का अंतिम संस्कार के साथ ही नरेंद्र भुटानी नेत्रदान को भी बढ़ावा दे रहे हैं, ताकि किसी के अंधियारे जीवन में उजाला कर सकें। उन्होंने बताया कि 8 दिसंबर 2010 को अपने साथियों के साथ मिलकर दृष्टि सेवा समिति बनाई। शुरुआत में उन्होंने अपने छह साथियों के साथ मिलकर इस मुहिम को आगे बढ़ाया। उन्होंने बताया कि दृष्टि सेवा समिति के प्रधान डॉ. एचबीडी अरोड़ा व उप प्रधान सुुभाष वशिष्ठ के साथ मिलकर लोगों को नेत्रदान के लिए जागरूक करते हैं। इस मुहिम के तहत 6 दिन के बच्चे से लेकर 100 साल तक के बुजुर्ग का नेत्रदान करवा चुके हैं। अब तक 2180 लोगों के नेत्रदान करवाए हैं। भुटानी ने बताया कि रविवार को भी सेक्टर-15 में शशि बाला गुप्ता का नेत्रदान करवाया। नेत्रदान की प्रक्रिया माधव आई बैंक करनाल ने पूरी की। इस दौरान सुभाष वशिष्ठ, डीके जैन, राजेंद्र गोयल मौजूद रहे।

कोरोना में जान गंवाने वालों का करवाया अंतिम संस्कार
नरेंद्र भुटानी बताते हैं कि कोरोना महामारी ने लोगों के दिलों में ऐसा खौफ पैदा कर दिया था कि लोगों ने अपनों के शव भी लेने से इनकार कर दिया था। ऐसे में सेक्टर-15 स्थित श्मशाम घाट में नगर निगम कर्मचारियों के साथ मिलकर कोरोना में जान गंवाने वाले करीब छह लोगों का अंतिम संस्कार करवाया। यही नहीं उनकी अस्थियों को हरिद्वार ले जाकर गंगा में प्रवाहित करवाया।

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