मोबाइल पर अमित सरोहा का मुकाबला देखते अमित के भाई सुमित सरोहा, विजय सरोहा व परिवार के अन्य सदस्य।
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सोनीपत। टोक्यो पैरालंपिक में बुधवार को क्लब थ्रो स्पर्धा में गुरु-शिष्य देश के लिए पदक लाने का अपना सपना पूरा नहीं कर सके। दोनों खिलाड़ियों से देशवासियों और उनके परिजनों को पदक की आस थी। इसके लिए दोनों ने कड़ा अभ्यास भी किया था। बुधवार को खेले गए मुकाबले में गुरु अमित सरोहा अपना बेस्ट भी नहीं दोहरा पाए, वहीं शिष्य धर्मबीर नैन 25.59 मीटर ही थ्रो कर सके।
टोक्यो पैरालंपिक में देश की झोली में पदक डालने के लिए गांव बैंयापुर के अमित सरोहा व गांव भदाना के धर्मबीर नैन ने जमकर पसीना बहाया था। दोनों खिलाड़ियों के दृढ़ संकल्प व रोजाना कई घंटों तक किए जाने वाले कड़े अभ्यास को देखते हुए सभी को दोनों से पदक की उम्मीद थी। दोपहर बाद 3.55 बजे शुरू हुए मुकाबले को लेकर परिजनों व खेलप्रेमियों में उत्सुकता थी। सभी मोबाइल व अन्य माध्यमों से मुकाबला देख रहे थे। मुकाबले के बाद परिजनों ने कहा कि दोनों खिलाड़ियों ने देश के लिए पदक लाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन पदक का सपना पूरा करने से चूक गए। सभी ने दोनों खिलाड़ियों के प्रयासों की सराहना की।
हार-जीत खेल का हिस्सा
अमित सरोहा के भाई विजय सरोहा ने कहा कि अमित का अब तक का बेस्ट 30.33 मीटर रहा है। इस बार वह अपनी बेस्ट परफॉर्मेस भी नहीं दोहरा पाए। हार-जीत खेल का हिस्सा होते हैं। जब दो खिलाड़ी मैदान में होंगे तो एक को तो हार का सामना करना ही पड़ेगा। अमित इस बार देश के लिए पदक का सपना पूरा नहीं कर सकें, हमें उम्मीद है कि वह भविष्य में बेहतर तैयारी के साथ मैदान में उतरेंगे और अपने प्रदर्शन को ओर बेहतर करते हुए देश के लिए पदक जीतेंगे।
10 दिन से सोशल मीडिया से बनाई हुई थी दूरी
अमित सरोहा तीसरी बार पैरालंपिक में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, वहीं धर्मबीर नैन का यह दूसरा पैरालंपिक था। अमित सरोहा ने पैरालंपिक शुरू होने से 10 दिन पहले ही सोशल मीडिया से दूरी बना ली थी। वे अपना पूरा ध्यान अभ्यास पर केंद्रित किए हुए थे। वहीं धर्मबीर नैन भी अभ्यास पर फोकस कर रहे थे।