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कोच प्रीतम सिवाच द्रोणाचार्य अवॉर्ड के लिए चयनित

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कोच प्रीतम सिवाच द्रोणाचार्य अवॉर्ड के लिए चयनित
- देश की पहली महिला हॉकी कोच, जिसे द्रोणाचार्य अवार्ड के लिए चुना गया
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले जिले के छह खिलाड़ियों के साथ ही महिला हॉकी कोच प्रीतम सिवाच को राष्ट्रीय खेल पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। महिला हॉकी को देश में नई पहचान दिलाने मेें अहम भूमिका निभाई वाली कोच प्रीतम सिवाच को द्रोणाचार्य अवॉर्ड के लिए चयनित किया गया है। जिससे खेलप्रेमियों में खुशी की लहर है। द्रोणाचार्य अवॉर्ड के लिए चयनित प्रीतम सिवाच ऐसी पहली महिला कोच हैं, जिनको हॉकी में द्रोणाचार्य अवॉर्ड के लिए चयनित किया गया है।
टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम ने अपने शानदार प्रदर्शन से महिला हॉकी को देश में नई पहचान दिलाने का काम किया है। इस टीम में सोनीपत से तीन खिलाड़ी शामिल रही, जिन्होंने कोच प्रीतम सिवाच से हॉकी के गुर सीख ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन किया।
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वर्ष 2004 से दे रही हैं प्रशिक्षण
प्रीतम सिवाच बताती हैं कि देश को महिला हॉकी में ओलंपिक पदक मिले। इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने सोनीपत के औद्योगिक क्षेत्र में लड़कियों को प्रशिक्षण देना शुरू किया था। वह वर्ष 2004 से लड़कियों को प्रशिक्षण दे रही हैं। इस समय उनकी देखरेख में करीब 200 लड़कियां नियमित रूप से हॉकी का अभ्यास कर रही हैं। प्रीतम सिवाच की नर्सरी से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी निकल रही हैं। कड़ी मेहनत व समर्पण भाव से प्रीतम ने सोनीपत को शाहबाद के बराबर खड़ा कर दिया है। हर बार राष्ट्रीय टीम में शामिल होने वाली खिलाडिय़ों में सोनीपत की 3-4 खिलाडिय़ों का शामिल होना आम बात हो गई है।
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1998 में मिल चुका है अर्जुन अवार्ड
प्रीतम सिवाच बताती हैं कि उन्हें वर्ष 1998 में अर्जुन अवॉर्ड मिला था। 15 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद किसी महिला खिलाड़ी को अर्जुन पुरस्कार मिला था। पुरस्कार मिलने से उन्हें प्रेरणा मिली। वर्ष 2002 में राष्ट्रमंडल खेलों में देश के लिए स्वर्ण जीता। वर्ष 2008 में देश को ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करवाया, लेकिन उनकी टीम वहां कोई पदक नहीं जीत सकी थी।
अच्छा काम करने की मिलेगी प्रेरणा, लड़कियां होंगी प्रेरित : प्रीतम
प्रीतम सिवाच का कहना है कि द्रोणाचार्य अवार्ड मिलना गौरव की बात है। इससे ओर बेहतर काम करने की प्रेरणा मिलेगी। वहीं लड़कियां भी इससे प्रेरित होंगी।
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