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World Bicycle Day: 20 सालों से साइकिल चलाओ, प्रदूषण भगाओ का संदेश दे रहे अरुण

Fri, 03 Jun 2022 02:25 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)

सार

अरुण विश्व साइकिल दिवस पर शहर में 10 किलोमीटर की साइकिल यात्रा निकालेंगे। कृषि विभाग से सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी देवेंद्र कुहाड़ साइकिल पर कार्यालय आते हैं।
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साइक्लिस्ट अरुण मलिक। देवेंद्र कुहाड़, सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी, कृषि विभाग, सोनीपत। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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वर्तमान में मनुष्य हर काम मशीनों से करने लगा है। साइकिल का स्थान बाइक ने ले लिया है। भागदौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य के पास खुद के लिए भी समय नहीं है। जिसका उसके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। बढ़ते वाहनों के प्रचलन व लुप्त हो रही साइकिल को आज भी कई युवा जिंदगी का हिस्सा बनाए हुए हैं।

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इनमें से एक हैं, सेक्टर-23 निवासी अरुण मलिक। जो साइकिल के प्रति युवाओं को जागरूक ही नहीं कर रहे, बल्कि 20 सालों से साइकिल चलाओ, प्रदूषण भगाओ का संदेश दे रहे हैं। उनके अभियान से बड़ी संख्या में युवा जुड़े हैं, जो विश्व साइकिल दिवस पर शुक्रवार को शहर में 10 किलोमीटर की साइकिल यात्रा निकालेंगे। 

विश्व साइकिल दिवस पर मूलरूप से हरियाणा के सोनीपत के गांव रिवाड़ा फिलहाल सेक्टर-23 निवासी अरुण मलिक से बात की गई तो उन्होंने कहा कि साइकिल ने जिंदगी ही नहीं नजरिया भी बदल दिया है। साइकिल चलाने की जिद कब जुनून बन गई पता ही नहीं चला। अरुण मलिक बताते हैं कि जब वह पांचवीं कक्षा में शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, तब साइकिल चलाने की जिद की थी।
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उस समय मेरे ताऊ ने कहा था कि साइकिल तो हमारे जमाने में चलाते थे, आजकल के बच्चों को कहां साइकिल चलानी आती है। उनकी यही बात दिल में घर कर गई और साइकिल चलाने की ठान ली। साइकिल चलाना सीखा और सोनीपत से गांव तक ताऊ को दिखाने के लिए साइकिल चलाकर गया। वहां से शुरू हुआ साइकिल पर सफर आज भी जारी है। 20 साल से एक ही साइकिल हैं, जिस पर करीब 90 हजार किलोमीटर तक का सफर तय किया है। 

ये उपलब्धियां हासिल कीं

  •  वर्ष 2020 में इंटरनेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाया
  •  वर्ष 2021 में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाया
  •  इंडिया गेट से हिमाचल प्रदेश के अटल टनल तक साइकिल यात्रा करने वाले देश के पहले युवा बनने का गौरव मिला
  •  जयपुर से सोनीपत तक 374 किलोमीटर तक का सफर एक ही रात में तय करने का बनाया रिकॉर्ड
  •  प्रदूषण मुक्त भारत बनाने के लिए 2300 किलोमीटर की राजस्थान साइकिल यात्रा कर अनोखा कारनामा रचा, यह यात्रा सिंगल गियर साइकिल पर 12 दिन में पूरी की।

जिले में नहीं कोई साइकिल ट्रैक
अरुण मलिक बताते हैं कि जिले में कहीं पर भी साइकिल ट्रैक नहीं है। जो युवा साइकिल चलाने के क्षेत्र में जाना चाहते हैं, उन्हें अभ्यास करने के लिए दिल्ली दौड़ लगानी पड़ती है। उन्होंने साइकिल चलाने को बढ़ावा देने के लिए जिले में साइकिल ट्रैक बनाने की मांग की है। साथ ही कहा है कि सड़क किनारे साइकिल के लिए अलग से लेन बनानी चाहिए। साइकिल चलाने का प्रचलन बढ़ेगा तो हादसे भी कम होंगे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, जिसे साइकिल का प्रयोग बढ़ाकर कम किया जा सकता है।

नागरिक अस्पताल के फिजिशियन राकेश फौगाट ने साइकिल चलाने के बताए ये फायदे

  • साइकिल चलाने से हृदयाघात की संभावनाएं कम हो जाती हैं। 
  • साइकिल चलाने से ब्रेन स्ट्रोक व लकवा जैसी बीमारियों की संभावना कम हो जाती है।
  • साइकिल चलाने से वजन को आसानी से कम किया जा सकता है।
  • इससे श्वास संबंधी रोगों से छुटकारा मिलता है।
  • शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। 


आज निकाली जाएगी साइकिल यात्रा
अरुण मलिक ने बताया कि विश्व साइकिल दिवस पर शुक्रवार को 10 किलोमीटर की साइकिल यात्रा निकाली जाएगी। यह साइकिल यात्रा सेक्टर 23 से सुबह 7 बजे शुरू होगी। जो तिरंगा चौक, देवीलाल चौक, बस अड्डा, आईटीआई चौक होते हुए सेक्टर-23 पहुंचेगी। शहर में निकाली जाने वाली साइकिल यात्रा में करीब 100 युवा भाग लेंगे। 

कृषि विभाग के अधिकारी डॉ. देवेंद्र कुहाड़ दूसरों के लिए बन रहे मिसाल 
सरकारी कार्यालयों में जहां सभी अधिकारी व कर्मचारी बाइक व कारों से कार्यालय पहुंचते हैं, वहीं कृषि विभाग के सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी डॉ. देवेंद्र कुहाड़ साइकिल पर कार्यालय पहुंचते हैं। मूलरूप से बड़वासनी फिलहाल सेक्टर 23 निवासी देवेंद्र कुहाड़ का कहना है कि साइकिल चलाने से पर्यावरण प्रदूषण नहीं होता साथ ही शरीर भी स्वस्थ्य रहता है।

डॉ. देवेंद्र कुहाड़ का कहना है कि उनका प्रयास रहता है कि वे जितना अधिक हो सके साइकिल का ही प्रयोग करें। बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए हमारा एक प्रयास स्थिति परिवर्तन कर सकता है। हमारा छोटा सा प्रयास आने वाली पीढ़ी को बेहतर भविष्य देने के लिए काफी है।

उन्होंने कहा कि बेटा राजस्थान के कोटा में पढ़ने गया था। वहां उसके पास रहने गया तो दिन में टाइम पास करने के लिए साइकिल चलाने लगा। जिसके बाद तो कोटा और उसके आसपास भ्रमण साइकिल से ही कर डाला। सोनीपत आते ही यहां भी साइकिल खरीद ली। इससे स्वास्थ्य में भी सुुधार हो गया और काफी ऊर्जावान महसूस करने लगा।

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