सिरसा। चार दिन पहले पटियाला की भाखड़ा नहर में गिरी कार में सवार पांच सदस्यों में से दो सदस्यों का शव घटनास्थल से करीब 200 किलोमीटर दूर डबवाली भाखड़ा नहर में बरामद हुआ है। शव की पहचान जसविंद्र सिंह उर्फ बब्बू और इशिका के रूप में हुई है। दोनों की पहचान पिता और बेटी के रूप में हुई है। जबकि इनके ही परिवार के दो सदस्यों के शव घटनास्थल से ही बरामद हुए थे। अभी इनके इकलौते बेटे पीरू नहीं मिल पाया है।
बुधवार देर रात को डबवाली के सदर थाना और सिटी थाना क्षेत्र से गुजरने वाले भाखड़ा नहर से दोनों के शव बरामद हुए है। जिसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर उन्हें नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए पहुंचाया और मामले की जानकारी उनके परिजनों को दी।
पुलिस ने पीड़ित परिवार के सदस्य सनी बाहिया के बयान दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम करवा परिजनों को सौंप दिया है। वहीं पुलिस अब उनके इकलौते नौ वर्षीय बेटे की तलाश भी कर रही है। डबवाली सदर थाना के एसआई सुरेंद्र ने बताया कि पिता-पुत्री के शव बरामद होने के बाद पोस्टमार्टम करवाया गया है और उन्हें परिजनों को को सौंप दिया गया है।
यह थी पूरी घटना
रामपुरा फूल की सहारा समाज सेवा के अध्यक्ष संदीप कुमार ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि दो जनवरी को जसविंद्र कुमार उर्फ बबलू अपने परिवार के साथ माता मंशा देवी के दर्शन करने के लिए गया था। कार में परिवार के पांच सदस्य सवार थे। इनमें जसविंद्र कुमार उर्फ बबलू, पत्नी नीलम रानी, दो बेटियां इशिका व स्मिता उर्फ शिखा, बेटा पीरू कार में सवार थे।
मंशा देवी से लौटते समय दो जनवरी रात करीब 12 बजे पटियाला उनकी कार भाखड़ा नहर में जा गिरी। जिसके बाद आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचित किया। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची और गोताखोरों को उनकी तलाश में लगा दिया। हादसे के अगले दिन तीन जनवरी को जसविंद्र कुमार की पत्नी नीलम और बेटी स्मिता का शव बरामद हो गया। जबकि परिवार के अन्य तीन सदस्य नहीं मिले थे। बुधवार देर रात को पिता जसविंद्र और बेटी इशिका का शव भाखड़ा नहर डबवाली से बरामद हुआ है। अभी उनके बेटे पीरू की तलाश की जा रही है।
बेटी की नौकरी लगने पर मंशा देवी माथा टेकने गया था परिवार
परिजन सन्नी बाहिया ने बताया कि जसविंद्र कुमार बठिंडा के रामपुरा फूल की अग्रवाल कॉलोनी का रहने वाले थे। उनकी रामपुरा फूल में ही कीटनाशकों की दुकान थी। बड़ी बेटी स्मिता उर्फ शिखा की निजी कीटनाशक की कंपनी में नौकरी लगी थी। परिवार के सभी सदस्य माता मंशा देवी के दर्शन करने के लिए गए थे और वहां से लौटते समय यह हादसा हो गया था।