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25 साल से 20 गांव झेल रहे सेम : सारा वोट मांगण आवै, समस्या म्हारी सुणै कौनी

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शाहपुरिया गांव के पास सेम नाला के पास चल रहा काम। संवाद - फोटो : Sirsa
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भूपेंद्र पंवार
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सिरसा। ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र के चोपटा खंड के लोगों में राजनेताओं के प्रति खासी नाराजगी है। हालांकि जो पार्टी से जुड़े हैं, वे कहते हैं कि वोट तो देवांगे लेकिन म्हारै नेता ही म्हारी कौनी सुणै। उपचुनाव में चौपटा के 20 से ज्यादा गांवों के लोगों को चुनाव से ज्यादा अपनी खेती और जीवन बचाने की चिंता है। 20 से ज्यादा गांव 25 साल से सेम की समस्या झेल रहे हैं, लेकिन लेकिन इसकी सुध आज तक किसी भी सरकार और विधायक ने नहीं ली। हर बार चुनाव में सेम की समस्या का मुद्दा बनता है। चुनाव के बाद फिर गुम हो जाता है। सीएम मनोहर लाल ने घोषणा के तहत वायदा किया कि क्षेत्र में सेम की समस्या से छुटकारे के लिए 100 करोड़ का प्रोजेक्ट लगाया जाएगा, लेकिन ये प्रोजेक्ट भी कागजों में गुम हो गया।
गांव शाहपुरिया के शंकर लाल का गुस्सा इस कद्र हावी है कि वे कहते हैं आज पांच दिन बाद ठीकरी पहरा देकर आया हूं। वोट देण नै ही जी कौनी करै। इसी प्रकार केसरा राम और जयकिशन ने कहा कि राजनेता सिर्फ चुनाव के वक्त याद करते हैं। गांव शाहपुरिया के ही हरी सिंह, राम चंद्र, लीलू राम, विजेंद्र, तेलू राम कहते हैं कि यहां उम्मीदवार कोई भी आ जाए, लेकिन वोट लेकर भूल जाता है। शक्करमंदौरी के किसान जगदीश कुमार का कहना है कि सेम समस्या गंभीर है और इसका समाधान भी जरूरी है। दड़बा कलां के जनक राज ने कहा कि कोई भी नेता समाधान की ओर ध्यान नहीं देता। कई गांवों के लोगों ने तो यहां तक कहा कि हो सकता है, चुनाव का भी बहिष्कार करने का फैसला ले लिया जाए।
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22 हजार एकड़ जमीन हुई बंजर, पानी का स्तर दो फुट पर
ऐलनाबाद विधासभा क्षेत्र में चौपटा के भी गांव आते हैं। किसी समय खुद विधानसभा क्षेत्र रहे दड़बा गांव राजनेताओं की जन्म भूमि है। चौपटा क्षेत्र के गांव दड़बा, माखोसरोनी, शक्कर मंदौरी, शाहपुरिया, नहराणा, निर्बाण, लुदेसर, मानक दीवान, रूपाणा खुर्द, नारायण खेड़ा, गुडियाखेड़ा, रूपावास, तरकांवाली, कैरांवाली सहित करीब 20 गांवों में सेम की समस्या है। यहां भूमिगत पानी का स्तर केवल 2 फुट है और बरसात के सीजन में तो पानी खेतों की सतह पर रहता है। ऐसे में ना तो फसल होती है और न ही कोई अन्य काम। करीब 20 गांवों की करीब 22 हजार एकड़ जमीन बंजर हो गई है। हालांकि सेम नाला निकाला गया है, ताकि सेम का पानी इसमें डाला जा सके। लेकिन सेम नाला की नियमित सफाई का काम भी सरकार नहीं करवा पा रही। ऐसे में सेम नाला कमजोर होकर टूटता है। इस बार अभी तक 7 बार सेम नाला टूट चुका है। इससे 1000 एकड़ से ज्यादा की फसल खराब हो चुकी है। इतना ही नहीं बड़ी संख्या में ट्यूबवेल भी पानी में डूबने से खराब हो गए हैं। अब ग्रामीण ठीकरी पहरा लगाकर अपने स्तर पर राहत के काम करवाने में जुटे हैं। अब चुनावी माहौल के बीच लोगों की राजनेताओं के प्रति खासी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीण कहते हैं कि चुनाव को देखा जाएगा, पहले जान तो बचा लें। ग्रामीण कहते हैं कि जिंदा रहे तो वोट भी दे देंगे।
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ग्रामीण बोले- सरकार ने की थी 100 करोड़ के प्रोजेक्ट की घोषणा, कागजों में हुई गुम
गांव शक्करमंदौरी के सरपंच सुरेंद्र कुमार का कहना है कि सेम की समस्या से निजात के लिए सीएम मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी। इसके तहत वायदा किया गया था कि 100 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट सरकार लाएगी। इसके तहत कहा गया था कि सौर ऊर्जा से चलने वाले ट्यूबवेल लगाकर पानी निकाला जाएगा। सेम नाला में डाला जाएगा। लेकिन ये प्रोजेक्ट भी खटाई में पड़ गया है। लोगों ने अपने स्तर पर ही कुछ काम करवाया है।
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