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लापरवाही : पिंक बॉक्स लगाना भूल गया प्रशासन छात्राओं को कैसे मिलेगी सुरक्षा

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राजकीय वरिष्ठ कन्या महाविद्यालय में लगी शिकायत पेटिका। - फोटो : Sirsa
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सिरसा। शिक्षण संस्थानों की छात्राओं को सुरक्षा प्रदान करने और उनकी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचाने के लिए पिंक बॉक्स लगाने की योजना बनी लेकिन जिला प्रशासन बॉक्स यानी शिकायत पेटिका लगाना ही भूल गए। ऐसे में छात्राओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है, ये बड़ा सवाल है। इस समय शहर या शिक्षण संस्थानों में कहीं भी पिंक बॉक्स नहीं दिखाई दे रहे हैं।
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दो साल पहले जिला प्रशासन ने जिला शिक्षा अधिकारी को सभी विद्यालयों में पिंक बॉक्स लगाने के निर्देश दिए गए थे। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी स्कूलों को पत्र लिखकर आदेश जारी किए थे कि सभी स्कूलों में पिंक बॉक्स लगाना अनिवार्य है। लेकिन जिला प्रशासन के साथ-साथ शिक्षा विभाग भी इन आदेशों को भूल गया है।
शुक्रवार को शहर की विभिन्न जगहों के साथ-साथ विद्यालयों में जाकर पड़ताल की गई। लेकिन कुछ विद्यालयों को छोड़कर कहीं भी पिंक बॉक्स दिखाई नहीं दिए गए। जिन स्कूलों में बॉक्स दिखाई दिए वहां भी पिंक बॉक्स की जगह सामान्य शिकायत पेटी नजर आई और पिछले दो साल से बॉक्स को खोला ही नहीं गया है। वहीं एक स्कूल का तो कहना था कि स्कूल में बॉक्स की जरूरत ही नहीं पड़ती क्योंकि छात्राएं ऑफिस में आकर ही शिकायत दर्ज करवा देती है। वहीं विद्यार्थियों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें पता ही नहीं है कि पिंक बॉक्स क्या होते है। विद्यार्थी पूजा, कोमल, रचना, कशिश ने बताया कि विद्यालय द्वारा उन्हें कभी भी नहीं बताया गया है कि पिंक बॉक्स क्या होते हैं। वहीं इन बॉक्स में शिकायत लिखकर दी जानी है इसके बारे में भी नहीं बताया गया है। क्योंकि विद्यालय में बॉक्स तो लगा हुआ है लेकिन न तो उसे कभी खोला गया है और न ही उसके ऊपर कुछ लिखा हुआ है।
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सार्वजनिक स्थानों पर भी लगाए गए थे बॉक्स
महिलाओं, स्कूल, कोचिंग सेंटर जाने वाली छात्राओं सहित अन्य की सुरक्षा के लिए पिंक बॉक्स लगवाने के निर्देश जारी हुए थे। 2019 सितंबर में शहर के भीतर पिंक बॉक्स लगाने की कवायद हुई। इनमें गर्ल्स कॉलेज के साथ-साथ उन जगहों पर भी पिंक बॉक्स लगवाने थे, जहां महिलाओं की आवाजाही ज्यादा होती है। तब पुलिस टीम ने कुछ जगहों पर पिंक बॉक्स लगवाए भी थे। लेकिन बाद में देखभाल के अभाव में यह गायब होते चले गए।
पिंक बॉक्स में छात्राएं ये कर सकती हैं शिकायतें
- स्कूल में लगे पिंक बॉक्स में छात्राएं छेड़छाड़ के बारे में गुप्त सूचना डाल सकती है।
- छात्राएं बाल विवाह के बारे में बता सकती हैं।
- छात्राएं उसके साथ हुए गलत काम हुआ इसके बारे में बता सकती हैं।
- किसी द्वारा अभद्र व्यवहार या टिप्पणी के बारे में बता सकती हैं।
- किसी द्वारा अनचाहे तरीके से छूए जाने पर शिकायत कर सकती हैं।
भूल गए अधिकारी
पिंक बॉक्स लगाने की शुरूआत तो जोर-शोर से हुई। लेकिन वक्त के साथ पुलिस अधिकारी इस योजना को भूल गए। फिलहाल कुछ स्कूलों में लगे पिंक बॉक्स सुरक्षित तो हैं, लेकिन लॉकडाउन में बंद होने से उनका उपयोग नहीं हो सका। अब जबकि ज्यादातर स्कूल, कॉलेज और कोचिंग सेंटर खुल चुके हैं। युवतियों और छात्राओं की आवाजाही बढ़ गई है। ऐसे में सुरक्षा के लिहाज से पिंक बॉक्स काफी जरूरी हो गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने पत्र जारी कर आदेश दिए गए थे। जिसे बाद स्कूल में पिंक बॉक्स लगाए गए थे। लेकिन बॉक्स में कभी शिकायतें आई ही नहीं इसलिए उसे खोला ही नहीं गया। वहीं महिला प्राचार्य होने के कारण बच्चियां स्वयं ही मेरे पास शिकायतें लेकर आ जाती हैं।
-जसबीर कौर, प्राचार्य, राजकीय वरिष्ठ कन्या माध्यमिक विद्यालय।
विद्यालय में बच्चियां कक्षा इंचार्ज को ही समस्याएं बता देती है। जिसके कारण शिकायत पेटिका में उनको शिकायतें डालने की जरूरत ही नहीं पड़ी। वहीं पेटिका लगने के बाद इन दो सालों में एक भी शिकायत नहीं आई है।
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-अनिल गुप्ता, प्राचार्य, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, महाबीर दल।
स्कूल में शिकायत पेटिका हैं लेकिन पिंक बॉक्स के लिए हमारे पास कोई ऑर्डर नहीं है।
-मदन मलिक, राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल, अनाज मंडी, सिरसा।
दो साल पहले मेरी यहां ज्वाइनिंग नहीं हुई थी, इसलिए मुझे इसके बारे में जानकारी ही नहीं है। इस बारे में पता कर जल्द संज्ञान लिया जाएगा।
- सीमा सोढ़ी, एसएचओ, महिला थाना।

विद्यालय में बिना नाम के लगी पेटिका।- फोटो : Sirsa

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