संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शहर को बेसहारा पशुओं से मुक्त करने के लिए सीएम घोषणा के तहत नंदीशाला की स्थापना की गई। लेकिन सरकार नंदीशाला स्थापित करके भूल गई और प्रशासन का रवैया भी उदासीन हो गया। सरकारी तौर पर नंदीशाला तो स्थापित हो गई लेकिन पशुचारा के लिए फंड न मिलने से संकट गंभीर होता जा रहा है। नंदीशाला के प्रबंधक बताते हैं कि सरकार की ओर से पिछले वर्ष मई माह में 1.70 लाख रुपये का फंड आया था। इसके बाद कोई सहयोग नहीं मिला। नंदीशाला के संचालन का प्रतिदिन का करीब 40 हजार रुपये का खर्चा है। ऐसे में समाजसेवी ही आत्मनिर्भर होकर संचालन कर रहे हैं।
शहर में करीब तीन हजार से ज्यादा बेसहारा पशु सड़कों पर विचरण कर रहे हैं। ऐसे में समाजसेवियों ने एकत्र होकर इस समस्या के निदान पर मंथन किया। इसके तहत प्रस्ताव भेजा गया कि नंदीशाला की स्थापना की जाए, लेकिन जगह का अभाव होने के कारण परियोजना सिरे नहीं चढ़ पाई। मुख्यमंत्री के संज्ञान में मामला लाया तो सीएम ने घोषणा की गई सरकारी तौर पर नंदीशाला की स्थापना की जाएगी। इस पर काम शुरू हुआ। लंबी जद्दोजहद और कई विवादों के बाद फैसला लिया गया कि केलनियां में नंदीशाला की स्थापना की जाए। सरकार ने यहां करीब चार एकड़ भूमि पर नंदीशाला की स्थापना कर दी। इसके संचालन की जिम्मेदारी समाजसेवियों की लगाई। नंदीशाला की स्थापना करके सरकार बजट देना ही भूल गई। दूसरी ओर आरोप ये भी हैं कि प्रशासन का रवैया भी नंदीशाला के प्रति उदासीन हो गया। ऐसे में नंदीशाला के संचालन पर संकट खड़ा हो गया।
15 करोड़ रुपये का बजट किया जारी, नंदीशाला को कितना मिलेगा पता नहीं
केलनियां नंदीशाला में इस समय करीब 400 पशु हैं। इनमें करीब 100 गाय हैं। 50 दूधारु गाय हैं, जबकि करीब 50 गाय ऐसी हैं जो दूध नहीं दे पाती। इसके अलावा अन्य नंदी हैं। नंदीशाला के प्रबंधक बताते हैं कि सरकार की ओर से पिछले वर्ष मई माह में 1.70 लाख रुपये का फंड आया था। इसके बाद कोई सहयोग नहीं मिला। हालांकि सरकार की ओर से पत्र भी आया है कि 50 रुपये प्रति पशु प्रतिदिन के हिसाब से सरकारी सहयोग भी मिलेगा, लेकिन अभी तक कोई फंड नहीं मिला है। इसके अलावा सरकार की ओर से प्रदेेश भर की गोशालाओं के लिए भी करीब 15 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया है, उसमें से नंदीशाला को कितना मिलेगा, ये भविष्य के गर्भ में है। बड़ी समस्या ये है कि नंदीशाला के संचालन का प्रतिदिन का करीब 40 हजार रुपये का खर्चा है। इसलिए खर्चा और आय के बीच समन्वय बनाना प्रबंधकों के लिए मुश्किल हो रहा है। नंदीशाला के संचालन के लिए करीब 25 कर्मचारी भी रखे गए हैं, जो दिन-रात यहां काम कर रहे हैं।
फंड के अभाव में नये पशु लेने से कर देते हैं इंकार, गाय रखने पर ज्यादा ध्यान
नंदीशाला की स्थापना का उद्देश्य ये था कि शहर में घूम रहे बेसहारा पशुओं खासकर सांडों को यहां रखा जा सके। सरकारी फंड न मिलने के कारण सारा बोझ समाजसेवियों पर आ गया। ऐसे में जिला प्रशासन की ओर से पकड़े जाने वाले पशुओं को भी नंदीशाला में रखने से इन्कार कर दिया जाता है। कभी बीमारी का बहाना बनाया जाता है, तो कभी फंड न होने का। इसके अलावा नगर परिषद की ओर से फंड न मिलने का भी तर्क दिया जाता है। सूत्र बताते हैं कि नंदीशाला संचालन करने वालों का ध्यान अब सांडों की अपेक्षा दुधारू गाय रखने पर ज्यादा है, ताकि दूध से आय शुरू हो सके। ऐसे में शहर में बेसहारा पशुओं की समस्या जस की तस रह गई है।
आज विधायक करेंगे नए गेट का शिलान्यास
नंदीशाला में नए गेट का निर्माण किया जाएगा। प्रधान पदम बंसल ने बताया कि शुक्रवार को इस गेट का शिलान्यास विधायक गोपाल कांडा करेंगे। इसके अलावा नंदीशाला में नए मंदिर का भी निर्माण कार्य किया जा रहा है। इतना ही नहीं नंदीशाला में फव्वारा सिस्टम भी स्थापित कर दिया गया है। गर्मियों में पशुओं को नहलाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाएगा। इतना ही नहीं, यहां पक्षियों के लिए भी विशेष चबूतरे का निर्माण किया गया है। इसे ट्यूरिस्ट स्थल के रूप में विकसित किया जा सके और शहरवासी यहां आएं। इसे पशुओं के लिए सहयोग मिल पाएगा।
देखिए, नंदीशाला संचालन के लिए प्रतिदिन करीब 40 हजार रुपये का खर्चा आता है। सरकार की ओर से ज्यादा सहयोग नहीं मिलता। पिछले वर्ष मई में केवल 1.70 लाख रुपये का फंड मिला। इसके अलावा 50 रुपये प्रतिदिन, प्रति पशु के हिसाब से भी फंड मिलने संबंधी पत्र तो आया है लेकिन फंड अभी तक नगर परिषद की ओर से नहीं मिला। वैसे अब नए गेट का निर्माण, नये शेड का निर्माण और मंदिर का निर्माण की योजना है। विधायक गेट का शिलान्यास करेंगे। -पदम बंसल, प्रधान, नंदीशाला, केलनियां।
पशु लें तो मिलेगा फंड : सीएसआई
जो नंदीशाला शहर से पकड़े जाने वाले पशुओं को लेगी, उसे 50 रुपये प्रति प्रतिदिन, प्रति पशु के हिसाब से मिलेंगे। जो पशु हमने भेजे थे, उनका ब्योरा तैयार है, जल्द ही फंड उपलब्ध करवा देंगे। नंदीशाला संचालकों की ओर से नए पशु लेने से इंकार करने के कारण शहर की समस्या जस की तस रह जाती है। - जयवीर सिंह, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर परिषद, सिरसा।