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नेशनल हाईवे के साथ लगी 30 स्थानों पर आग, हरसेक ने जिले में दिखाई केवल 27 आगजनी की लोकेशन

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सिरसा। जिले में धान की कटाई का सीजन चल रहा है। साथ ही किसान रबी फसल की बिजाई करने के लिए धान के अवशेषों को आग के हवाले कर रहे हैं। जिसके कारण पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता जा रहा है। वहीं इन आगजनी की लोकेशन को पकड़ने की जिम्मेदारी हरसेक के कंधों पर है। कृषि विभाग की ओर से अब तक केवल 142 स्थानों पर आगजनी की घटना होने पर किसानों के चालान काटे गए है लेकिन आगजनी के स्थानों की संख्या इससे कहीं अधिक ज्यादा है। धान के अवशेषों में आगजनी की घटनाएं बढ़ने के कारण एयर क्वालिटी इंडेक्स भी 275 पर है।
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आगजनी के इन मामलों को देखने के लिए जब संवाददाता ने अपने स्तर पर जांच की तो देखा की डिंग से सिरसा तक 23 किलोमीटर के एरिया में ही 30 जगहों पर धान के अवशेषों में लगी हुई मिली। आगजनी के यह सारे मामले नेशनल हाईवे 9 के साथ-साथ ही थे। किसान खेत में आग लगा वहां से चले जाते है ताकि चालान ना कटे। इन आगजनी से जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स 275 तक पहुंच गया है। जिसके कारण जिले वासियों की समस्या भी पहले से अधिक बढ़ना शुरू चुकी है। सांस और आंखों के मरीजों को इसके कारण अधिक परेशानी हो रही है। जिसके चलते अस्पतालों में मरीजों की संख्या में हर रोज बढ़ोतरी हो रही है।
इन-इन स्थानों पर मिले मामले
पहला मामले में डिंग रोड रंगोई के पास तीन जगहों पर 7 एकड़ में आग लगी मिली। मौजूखेड़ा के पास 4 एकड़ में, भावदीन के नजदीक 6 एकड़ में, संगर साधा कट के पास 2 खेतों मेें, मोरीवाला पीवीआर के नजदीक 3 एकड़ व सिकंदरपुर के पास 7 जगहों पर, सिरसा बाईपास के पास 3 जगह पर किसानों ने खेतों में फसल अवशेषों में आग लगा रखी थी।
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वहीं किसान खेतों में धान के अवशेेषों को आग लगाने के बाद और उसके बुझने के साथ ही सुपर सीडर से बिजाई कर रहे हैं। ताकि आगजनी का कोई निशान ना बचे। हरसेक अगर आग लगने की लोकेशन को ट्रेस भी कर लेता है, तो बिजाई होने के बाद ऐसा कोई निशान नहीं बचते जिससे आगजनी की घटना साबित हो सके। जिले में अब तक हरसेक द्वारा 246 लोकेशन को ट्रेस किया गया है। कृषि विभाग अधिकारियों द्वारा जिसमें से 142 मामलों में ही 3 लाख 70 हजार रुपये का जुर्माना किया गया है। शेष 124 लोकेशन में आगजनी की घटनाओं को गलत बताया गया है। विभाग लाखों प्रयासों के बाद भी धान के अवशेषों के प्रबंधन को लेकर कोई ठोस रणनीति बना किसानों को नहीं दे सका। जिसके चलते किसान धान के अवशेषों को आग के हवाले कर रहे हैं।
धान अवशेषों के प्रबंधन महंगे व अधिक समय लेने वाले
नाम ना बताने की शर्त पर भावदीन एक किसान ने बताया कि खेत में धान के अवशेष बहुत अधिक होते है। अधिक मात्रा में अवशेेषों के होने से बिजाई कार्य ठीक प्रकार से नहीं हो पाती। अगर करते है तो जैसे की गेहूं की फसल बढ़ती है तो जड़ों में दीमक की समस्या आ जाती है और फसल खराब हो जाती है। धान के अवशेषों का प्रबंधन महंगा पड़ता है और समय भी अधिक लगता है। इसलिए धान के अवशेषों को आग के हवाले करना पड़ता है।
रात को लगाते है आग और सुबह बिजाई
आग लगाने के जुर्माने से बचाने के लिए किसान धान के अवशेषों को शाम ढलने के बाद आग लगाते हैं। जिससे आसपास रहने वाला ना तो कोई शिकायत करता है और ना ही यह अधिकारियों की नजर में आता है। रात को आग लगाने के बाद किसान अलसुबह ही फसल की बिजाई शुरू कर देते हैं। वहीं रात के समय हरसेक भी लोकेशन ट्रेस नहीं कर पाता।
यह है जिले के पांच दिनों का एक्यूआई लेवल
11 नवंबर: 283
12 नवंबर: 307
13 नवंबर: 323
14 नवंबर: 266
15 नवंबर: 275
चालान किए जा रहे
धान के अवशेषों को आग के हवाले करने वाले किसानों के चालान किए जा रहे हैं। हरसेक से भी पूरे जिले पर नजर रखी जा रही है। गांवों में भी पटवारी और अन्य अधिकारियों की टीमों को तैनात किया जा रहा है। जिले में अभी तक 142 किसानों के चालान काटे गए हैं।
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-डॉ. बाबूलाल, कृषि उपनिदेशक, सिरसा
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