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चंडीगढ़ः हरियाणा रोडवेज की वर्कशॉप्स में बसें धोने वाले कर रहे मैकेनिक का काम, ब्रेकडाउन बढ़े

Sat, 16 Oct 2021 12:09 PM IST
प्रमोद कुमार यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हरियाणा रोडवेज की वर्कशॉप्स में कर्मियों का टोटा है। आलम यह है कि कई साल से पक्के कर्मियों की भर्ती ही नहीं हुई। बसें धोने वाले लोगों से मैकेनिक का काम करवाया जा रहा है। खराब होने वाली बसों की लगातार संख्या बढ़ती जा रही है, जिसके कारण ब्रेकडाउन बढ़ गए हैं। सड़कों पर बसें घटने लगी हैं।
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सांकेतिक चित्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा रोडवेज की वर्कशॉपों में तकनीकी कर्मचारियों का संकट गहराता जा रहा है। बसें धोने वाले कर्मचारी मैकेनिक का काम कर रहे हैं। मरम्मत कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होने पर बसों के ब्रेकडाउन बढ़े हैं। आउटसोर्सिंग पर ही तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती हो रही है। 1993 के बाद रोडवेज वर्कशॉपों को पक्के कर्मी मिले ही नहीं। जींद उपचुनाव से पहले हुई ग्रुप डी की भर्ती में परिवहन विभाग को कुछ सहायक वर्ग के कर्मचारी मिले थे। इन्हें वर्कशॉपों में लगाया गया, लेकिन एक भी आईटीआई पास नहीं निकला। बीटेक-एमटेक, बीए व मैट्रिक पास तो इनमें हैं, जिनसे वर्कशॉप में लोहार, वेल्डर, कारपेंटर व इलेक्ट्रिशियन का काम लेना मुश्किल हो रहा है। हालांकि, विभाग इन्हें इलेक्ट्रिशियन, ब्लैक स्मिथ का दर्जा दिए हुआ है। सूत्रों के अनुसार आउटसोर्सिंग पर भर्ती कर्मियों को वेतन अदायगी में भी मनमानी की जा रही है।
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प्रदेश में रोडवेज की 24 वर्कशॉप
प्रदेश में रोडवेज की 24 मुख्य वर्कशॉप हैं। जिनमें पक्के कर्मचारियों की संख्या निरंतर घटी है। हालात यही रहे तो बड़े पैमाने पर सेवानिवृत्ति के कारण 2024 तक पक्के कर्मचारी इक्का-दुक्का ही रह जाएंगे। रोडवेज में पहले तकनीकी कर्मचारियों के काम के हिसाब से चार ग्रुप हुआ करते थे, जो अब कम होकर दो रह गए हैं। इनमें भी सभी ट्रेड के कर्मचारी नहीं हैं। इससे ब्रेकडाउन के कारण सड़कों पर खड़ी होने वाली बसें दूसरे डिपो के कर्मचारियों से ठीक करवानी पड़ रही हैं। पहले अगर किसी डिपो की महीने में औसतन 10 बसें रूट पर खराब होती थी, तो अब 40-50 हो रही हैं। जबकि विभाग के अधिकारियों में यह धारणा है कि वर्कशॉपों में काम ही नहीं है।
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वर्कशॉपों में कर्मचारियों की स्थिति
-असिस्टेंट कारपेंटर, वेल्डर, लोहार, मैकेनिक के 90 फीसदी पद पक्की भर्ती न होने से हर डिपो में खाली। पदोन्नति न होने के कारण ही कुछेक डिपो में एक-दो कर्मी इन पदों पर हैं।
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-हेल्पर, मैकेनिक, इलेक्ट्रिशियन, कारपेंटर व वेल्डर के 50 फीसदी पद खाली।
-टर्नर, रेडिएटर रिपेयर कर्मी के 60 प्रतिशत पद रिक्त। कर्मचारियों को अवकाश बड़ी मुश्किल से मिल रहा।

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परिवहन मंत्री के समक्ष उठा मामला
वर्कशॉप कर्मचारियों ने परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा के समक्ष यह मामला उठाया है। उन्होंने हर वर्ग के तकनीकी कर्मचारियों की कमी की बात प्रमुखता से रखी है। परिवहन मंत्री का कहना है कि विभाग के अधिकारियों से इस बारे में रिपोर्ट मांगी जाएगी। तकनीकी कर्मचारियों की पक्की भर्ती लंबे समय से न होने के कारणों को भी जानेंगे।
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