रोहतक। गोहाना रोड की कृष्णा कॉलोनी व महावीर कॉलोनी के लोगों को जलभराव से काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। डिस्पोजल नहीं चलने से जब तक लोग कुछ समझते तब तक घरों में पानी भर गया। इनवर्टर पानी में डूबने से सामान पकड़ने पर करंट आने लगा। अनहोनी की आशंका में कोई परिवार समेत दो दिन छत पर रहा तो कोई रिश्तेदार के घर। मौके का लाभ उठाकर कुछ लोगों ने अपने घरों में पीड़ितों को शरण तो दी मगर 24 घंटे का किराया दो हजार रुपये तक वसूला।
जनस्वास्थ्य विभाग ने 16 जून को प्रशासन को रिपोर्ट सौंपते हुए कहा था कि गत वर्ष छोटूराम चौक व टीबी अस्पताल के नजदीक हुए जलभराव के मद्देनजर समुचित इंतजाम कर लिए हैं। प्रशासन को सौंपी रिपोर्ट में कितनी सच्चाई थी, यह वीरवार को हुई बारिश से सामने आ गई। इन दोनों ही स्थानों पर सर्वाधिक जलभराव हुआ। गोहाना रोड पर हुआ जबरदस्त जलभराव तीसरे दिन यानी शनिवार को भी जस का तस रहा। कृष्णा कॉलोनी और महावीर कॉलोनी की गलियों में एक से सवा फीट तक जलभराव रहने से लोग घरों में कैद रहे। वहीं, जलभराव खत्म हुआ तो घरों में पहुंचे लोग अपनी बर्बादी देखकर रोआंसे हो गए। शायद ही ऐसा कोई घर बचा होगा, जहां घरों में पानी घुसने से नुकसान न हुआ हो। लोगों ने बताया कि जैसा अक्सर तेज बारिश होने पर दरवाजों तक पानी भर जाता है, वैसा ही वीरवार को हुआ। चूंकि डिस्पोजल की मोटरें चल नहीं रहे थे, इसलिए आसपास की कॉलोनियों से भी तेजी से पानी आने लगा। जब तक वह कुछ समझ पाते तब तक पानी रफ्तार से घरों में घुसने लगा। इतना भी समय नहीं मिला कि पलंगों पर बिछे बिस्तर, अलमारियों में रखे कपड़े आदि उठाकर ऊंचाई पर रख दें। फ्रिज, इनवर्टर, पलंगों, खाने-पीने का सामान आदि पानी में डूब गया।
लोग बोले, हमारे नुकसान की भरपाई कौन करेगा
जलभराव खत्म होने के बाद घरों की सफाई कर रहे लोगों ने अपना दर्द बया करते हुए बताया कि उनका हजारों रुपये का नुकसान हुआ है। इसके लिए सरकारी तंत्र जिम्मेदार है, ऐसे में नुकसान की भरपाई कौन करेगा? अफसरों की लापरवाही से जनता का नुकसान हुआ है। ऐसे में जिम्मेदार अफसर से नुकसान की भरपाई करानी चाहिए।
कोट्स-
घर में तीन से चार फीट पानी भर गया। जिससे सारे कपड़े खराब हो गए। लकड़ी के पलंग खराब हो गए हैं। इनवर्टर व मशीनें खराब हो गई हैं। हालात देखकर कृपाल नगर में एक घर में कमरा लिया, जहां एक दिन का किराया दो हजार रुपये वसूला है जबकि खाने-पीने का सामान हमारा था।
- सन्नी शर्मा
बाहर से सूखे मेवा लाकर दुकानों पर सप्लाई करता हूं। वीरवार को इतनी तेजी से घर में जलभराव हुआ कि सारा सामान खराब हो गया। इनवर्टर व मोटर पानी में डूबने से पूरी तरह से खराब हो गई है। दस किलो से ज्यादा सूखे मेवा भी खराब हो गए हैं।
- मनोज
हमारे घर में दो तरफ से एकसाथ पानी घुसा। दो पलंग पूरी तरह से टूट गए हैं। फ्रिज फुंक गया है। इनवर्टर खराब हो गया। हालात इतने ज्यादा विकट थे कि बच्चों के साथ पूरा परिवार छत पर पहुंच गया। दो दिन परिवार ने किसी तरह से छत पर गुजारी। आज रात पानी उतरा है, तब उतरकर आए हैं।
- विमला देवी
यदि समय पर डिस्पोजल की मशीनें चल जातीं, तो शायद इतनी गंभीर हालात नहीं होते। अफसरों को चाहिए कि वह अब आएं और लोगों को हुए नुकसान को देखें। हमारे घर का सारा सामान खराब हो गया है। फ्रिज और पानी की मोटर पूरी तरह से खराब हो गई है। पलंग किसी योग्य नहीं बचे हैं।
- अमित