शिक्षा का सही मायने में उद्देश्य सामुदायिक सेवा और मानव कल्याण है। ये विचार एमडीयू के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने एआईसीटीई ट्रेनिंग एंड लर्निंग प्रायोजित ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) के उद्घाटन पर व्यक्त किए। इसका आयोजन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज एंड रिसर्च (इमसॉर) द्वारा किया जा रहा है।
प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय भविष्य में यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों में सामुदायिक सेवा विषय लागू करेगा। इसके तहत हर विद्यार्थी को नियमित रूप से सामुदायिक सेवा में भाग लेना होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के तहत सामुदायिक सोच व संपोषणीयता पर महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। 26 सितंबर से दो अक्तूबर तक आयोजित स्वच्छता पर्व इसी दिशा में एक प्रयास था। इस सत्र में सेंटर फॉर डिसेबिलिटीज स्टडीज की स्थापना की गई है। हरियाणा वेलफेयर सोसाइटी फॉर पर्सन्स विद हियरिंग एंड स्पीच इंपेयरमेंट की अध्यक्ष डॉ. शरणजीत कौर ने कहा कि समावेशी समाज की स्थापना समय की जरूरत है। समाज के सभी वर्गों, खासकर दिव्यांगजनों से संवेदनशीलता के साथ व्यवहार करना होगा। इस वर्ग के लोगों को मुख्य धारा में लाना होगा। नई शिक्षा नीति में सांकेतिक भाषा लागू करना सकारात्मक पहल है। एआईसीटीई के सदस्य प्रो. मन्नू वोहरा ने कहा कि तकनीकी विषयों के विद्यार्थियों को सामुदायिक सेवा से जुड़ना बेहद जरूरी है। स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर सुवल सी कुंभकर ने संपोषणीय समाज व सामुदायिक सेवा के जरिए सोशल कनेक्टिविटी पर व्याख्यान दिया। एफडीपी के संयोजक डॉ. रामफूल ओहलाण ने एफडीपी का उद्देश्य बताया।