डीएसपी रवि खुंडिया ने बताया कि साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए पहले उनको डराते हैं। जब उनको लगता है कि सामने वाला व्यक्ति डर गया है तो उसे वीडियो कॉल कर कहते हैं कि उसे डिजिटल अरेस्ट कर लिया है। वीडियो कॉल पर अपडेट रहने के लिए कहते हैं। ठग 24 घंटे पीड़ित पर वीडियो कॉल से निगरानी रखते हैं।
इसे डिजिटल अरेस्टिंग कहा जाता है। इसमें खाना खाते, सोते और कोई भी काम करते समय ठगों के साथ ऑनलाइन रहना होता है। यदि कोई ऐसा करना से इन्कार करता है तो उसे तत्काल पुलिस भेजकर गिरफ्तार कराने की धमकी देते हैं। साइबर ठग संबंधित व्यक्ति से पैसे मंगाते हैं और जब अपराधियों को यह लगता है कि उसके पास पैसे नहीं है तो फर्जी तरीके से मामला निपटाने की बात कहकर छोड़ देते हैं।
पंचकूला के मोहाली में स्किल डेवलपमेंट के डायरेक्टर को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 9 लाख रुपये ठगने का मामला सामने आया है।आरोपी 16 घंटे लगातार बातचीत करते रहे। एमडीसी निवासी ने बताया कि वे मोहाली में डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। 1 अगस्त की शाम करीब 5:30 बजे उनके मोबाइल फोन पर कॉल आई और कहा कि वह मुंबई पोस्ट ऑफिस से बोल रहा है। उनके नाम पर एक पार्सल पास आया है। इस पार्सल में पुलिस के आईकार्ड, उनकी यूनिफाॅर्म और 110 ग्राम केमिकल मिला।
साइबर ठग लोगों को नए-नए तरीकों से ठग रहे हैं और वह इस तरह के लोगों के झांसे में न आएं। चूंकि सीबीआई, पुलिस और बैंक अधिकारी एक साथ कभी भी इस तरह का काम नहीं करते हैं। इसलिए कोई आपको डराए तो सीधे उनके झांसे में न आएं, बल्कि पुलिस अधिकारियों को कॉल करें। - हिमांशु गर्ग, पुलिस अधीक्षक।