आईएमटी में रविवार की रात आठ बजे एक बिस्कुट कंपनी के पास हमलावर हुए सांड़ ने पीजीआई के सुरक्षा गार्ड की जान ले ली। वह बाइक से ड्यूटी पर जा रहा था। परिजनों की तहरीर पर थाना पुलिस ने इत्तफाकिया में मामला दर्ज किया है।
बलियाना गांव निवासी मृतक के चाचा देवेंद्र ने बताया कि मोहजीत उर्फ मोहित (24) पुत्र नरेंद्र सिंह पीजीआई में आउटसोर्स पर सुरक्षा गार्ड के तौर पर तैनात था। वह रविवार की रात करीब आठ बजे ड्यूटी पर जाने के लिए बाइक से निकला था। जब वह आईएमटी चौक के नजदीक पहुंचा तभी सामने से गोवंशों का झुंड दौड़ता हुआ आया। इस दौरान मोहजीत अपनी बाइक मोड़ने का प्रयास करने लगा। इसी बीच एक सांड़ उसपर हमला कर दिया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। सांड़ ने सींग से गार्ड के सीने में मार दिया। इस दौरान अंदरूनी अंगों में चोट लगने से तेजी से खून बहने लगा। इससे वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर गया। उधर, गुजर रहे राहगीरों ने हादसे की जानकारी आईएमटी थाना पुलिस को दी। पुलिस की सूचना पर परिजन घटनास्थल पर पहुंचे और घायल को लेकर एक निजी अस्पताल में पहुंचे, जहां उपचार के दौरान सुरक्षा गार्ड की मौत हो गई। परिजनों ने मामले की लिखित शिकायत आईएमटी थाना में दी है। आईएमटी थाना प्रभारी कुलदीप सिंह ने बताया कि परिजनों की तहरीर पर इत्तफाकिया में लिखा पढ़ी की गई है।
अधिकारी कर रहे गोवंशों को पकड़ने का दावा, हकीकत कुछ और
भले ही नगर निगम अधिकारी नियमित रूप से सड़कों पर घूम रहे बेसहारा गोवंश को पकड़कर गोशालाओं में छोड़ने का दावा कर रहे हैं, मगर हकीकत इसके इतर है। नगर निगम के सीएसआई सुंदर ने बताया कि सड़कों से बेसहारा गोवंश को पकड़ने का अभियान चलाया जा रहा है। टीम हर रोज गोवंश पकड़ने वाली गाड़ी के साथ सड़कों पर उतर रही है। जबकि हकीकत इसके उलट है। गोवंश पकड़ने वाला वाहन (कैटल व्हीकल) जलभराव से निपटने के लिए पंप व मोटरों को इधर-उधर ले जाने के लिए इस्तेमाल हो रहा है। कागजों में चल रहे गोवंश को पकड़ने के अभियान की वजह से शहर की हर गली-सड़क, चौराहों पर बेसहारा गोवंश का जमावड़ा लगने लगा है, जो जानलेवा होता जा रहा है। विगत दिनों गोवंश की चपेट में आकर तीन से चार लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं।
रात के अंधेरे में नहीं दिखाई देते हैं गोवंश
दिन छिपते ही सड़कों पर गोवंश के झुंड नजर आने लगते हैं। रात के समय वे सड़क पर दिखाई तक नहीं देते हैं। ऐसे में वाहन चालक उनसे टकरा कर घायल तक हो जाते हैं।
गोशाला में नहीं बढ़ रहे गोवंश, फिर कहां छोड़ जा रहे ?
नगर निगम के अधिकारी निगम की गोशाला में तीन हजार गोवंश होने का दावा कर रहे हैं, जो क्षमता से ज्यादा बताए जा रहे हैं। ऐसे में निगम अधिकारियों के गोवंश पकड़ने के दावे पर सवाल उठ रहे हैं। यदि निगम की गोशाला में गोवंश भेजे जा रहे हैं तो इनकी संख्या में इजाफा होनी चाहिए, लेकिन यहां कोई भी वृद्धि नहीं हुई है। सीएसआई सुंदर का कहना है कि शहर में एक अकेला नगर निगम की गोशाला नहीं है। यहां कई गोशालाएं हैं, जहां पर गोवंश को छोड़ा जा रहा है।
गोवंश को पकड़कर खत्म नहीं कर सकते हैं। जितने गोवंश पकड़े जाते हैं, उतने ही दूसरी जगहों से आ जाते हैं। निगम का अभियान तेजी से चल रहा है। आगे भी चलता रहेगा।
-नरहरि बांगड़, नगर निगम आयुक्त रोहतक