करीब एक साल तक चले किसान आंदोलन के दौरान कई नए चेहरे उभरकर सामने आए। जोकि आंदोलन से पहले किसान या किसी भी तरह की राजनीति में नहीं थे, जिन्हें जिले में कोई जानता भी नहीं था। लेकिन एक साल के आंदोलन ने उन्हें नई पहचान दी, नया मुकाम दिया।
इसमें पहला नाम राजू मकड़ौली का है। एक साल पहले वह सिर्फ गांव मकड़ौली तक सीमित थे। उनके दादा-परदादा ने कभी सरपंच स्तर की राजनीति भी नहीं की थी। राजू ने टोल फीस के लिए छोटा-मोटा आंदोलन किया था, जो आसपास के कुछ गांव तक सीमित थे। 26 नवंबर को पंजाब से किसानों का जत्था पानीपत टोल पहुंचा और इसी दिन ने सब कुछ बदल दिया। राजू किसान आंदोलन में शामिल हो गए। उनकी अगुवाई में मकड़ौली टोल प्लाजा पर धरना लगा। इसी दौरान वह 39 दिन भूख हड़ताल पर रहे। धरना चलता रहा और राजू की लोकप्रियता भी। भारतीय किसान यूनियन के प्रधान गुरनाम सिंह चढूनी एक दिन धरने पर आए। उसके कुछ समय बाद उन्होंने राजू को जिला प्रधान नियुक्त कर दिया। फिर अभय चौटाला धरने पर आए। एक दिन इसी धरने पर महापंचायत हुई, जिसमें राकेश टिकैत और चढूनी शामिल हुए। राजू की अगुवाई में किसान सीएम मनोहर लाल का घेराव करने बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय चले गए, हालांकि सीएम का चॉपर वहां उतरा ही नहीं। पिछले दिनों किलोई के प्राचीन शिव मंदिर में किसानों ने पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर समेत कई भाजपा नेताओं को बंधक बना लिया था। उस दौरान भी प्रशासन से बातचीत करने वाले प्रमुख नेताओं में राजू भी थे। जिले की एक और नेता कांता आलड़िया को भी आंदोलन से पहचान मिली। कांता पहले दलितों के मुद्दों तक सीमित थीं लेकिन वह भी आंदोलन से जुड़ीं। चढूनी ने उन्हें अपने संगठन का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया। इस तरह किसान आंदोलन में रोहतक जिले में सबसे ज्यादा फायदा चढूनी को मिला। उनका जिले में बहुत कम आधार था, पर उन्हें आधार वाले दो नेता मिल गए। इनके अलावा डॉ. अजय बल्हारा ने आईएमटी चौक पर महिलाओं का पिंक धरना शुरू करवाया। इसमें गीता अहलावत की अगुवाई में महिलाएं धरने पर बैठीं। डॉ. बल्हारा और गीता को भी पहले कोई नहीं जानता था। लेकिन अब ये दोनों भी जिले में किसानों की आवाज बन चुके हैं।
मकड़ौली में लगा था सबसे पहले धरना
राजू मकड़ौली ने बताया कि 26 नवंबर 2020 को किसान आंदोलन शुरू हो गया था। लेकिन उस समय पंजाब की भागीदारी ज्यादा थी। इसलिए हरियाणा में सत्ताधारी भाजपा-जजपा के नेता बार-बार यही दोहरा रहे थे कि आंदोलन सिर्फ किसानों का है। इसके बाद उन्होंने 16 दिसंबर 2020 को मकड़ौली टोल प्लाजा पर हरियाणा का पहला धरना शुरू किया था। 24 दिसंबर से अब तक यहां टोल की वसूली नहीं हुई। आसपास स्थित हुड्डा खाप गांवों के लोगों के सहयोग से ही यहां नियमित भंडारा चलता है। यहां हुई महापंचायत का खर्च भी हुड्डा खाप ने उठाया था।