पीजीआई की ओपीडी में बिना एप्रेन पहने मरीज कों देखते चिकित्सक। अमर उजाला
रोहतक। हेल्थ यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉ. जी अनुपमा के एक दिन पहले जारी किए गए कोविड नियमों के पालन संबंधी निर्देश बुधवार को पीजीआई की ओपीडी में बेअसर रहे। यहां डॉक्टर व अन्य स्टाफ खुद नियमों को धता बताते दिखाई दिए। किसी के चेहरे से मास्क गायब मिला तो किसी के गले में आईकार्ड नहीं था। कुछ ने एप्रेन ही नहीं पहना था। डॉक्टर का कमरा हो, दवा खिड़की या जांच केंद्र सभी जगह कोरोना के नियम तार-तार नजर आए। अमर उजाला टीम ने बुधवार दोपहर करीब 12 बजे ओपीडी की व्यवस्था का जायजा लिया तो यह स्थिति सामने आई।
बुधवार को ओपीडी के रिसेप्शन पर ही कोरोना नियमों का उल्लंघन साफ नजर आया। यहां विभिन्न विभागों में अनेक डॉक्टर खुद बगैर मास्क, मरों के बाहर मरीजों की भीड़ ने सामाजिक दूरी के नियम की धज्जियां उड़ाईं। अपनी बारी पहले आने की होड़ में एक-दूसरे से सटे मरीज घंटों खड़े रहे। इनमें से ज्यादातर के चेहरों पर मास्क नहीं थे। दोपहर 12 बजे के बाद तक भी मरीजों की भीड़ खत्म नहीं हुई थी। दवा खिड़की के बाहर भी यही स्थिति थी। जांच लैब के बाहर मरीजों भीड़ के बावजूद कर्मचारी बगैर मास्क व एप्रेन के नजर आए। ओपीडी में कहीं भी सैनिटाइजर दिखाई नहीं दिया।
कुलपति ने बैठक में दिए थे निर्देश
हेल्थ यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉ. जी अनुपमा ने मंगलवार को अधिकारियों की बैठक ली थी। यहां सभी को कोविड नियमों की पालना करने व ईमानदारी से ड्यूटी करने के निर्देश दिए। कुलपति ने ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले के खिलाफ कार्रवाई करते हुए घर का रास्ता दिखाने के तल्ख तेवर साफ किए। निजी कंपनी के कर्मचारियों से भी काम लेने और व्यवस्था बेहतर बनाने पर जोर दिया था।
आरोप : नर्सिंग अधीक्षक मनमर्जी से लगा रही ड्यूटी
अधिकारियों की बैठक में डॉक्टरों ने पीजीआई की नर्सिंग अधीक्षक की शिकायत की। उनका आरोप था कि नर्सिंग अधीक्षक अपनी मर्जी से स्टाफ की ड्यूटी लगाती हैं। इस काम में डॉक्टर की सलाह नहीं ली जाती है। डॉक्टर मुश्किल से स्टाफ को ओटी के काम में दक्ष करते हैं। इसके कुछ दिन बाद ही उसकी ड्यूटी बदल जाती है। इससे ऑपरेशन थियेटर में काम करना मुश्किल हो गया है। सीनियर ने जूनियर डॉक्टरों के रवैये का मुद्दा भी उठाया। आरोप है कि जूनियर उनकी बात की अनदेखी करते हैं।
वार्ड तीन में मिलीं अनियमितताएं
कुलपति ने पीजीआई के वार्ड तीन की व्यवस्था पर चिंता प्रकट करने के साथ व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। यहां कुछ आपत्तिजनक हरकत भी कुलपति के संज्ञान में आई है। तल्ख लहजे में इस तरह की हरकतों पर रोक लगाने की आवश्यकता जताई गई। वहीं मॉड्यूलर मोर्चरी की फाइल फिर खोलने की तैयारी हो गई है। इसके निर्माण को लेकर रास्ता साफ हो सकता है। यह मुद्दा कुलपति खुद देखेंगी। इस संबंध में फोरेंसिक विभाग के एचओडी से मुलाकात कर स्थिति की जानकारी भी ली है। साथ ही कोरोना काल में ड्यूटी को लेकर भी कुलपति ने डॉक्टरों को हड़काते हुए छवि सुधारने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि संस्थान के चिकित्सकों की छवि कोरोना काल में अच्छी नहीं रही। निजी व सरकारी अस्पतालों के आंकड़े भी यही बता रहे हैं। सरकारी संस्थान में ही मौतें ज्यादा हुई हैं।