डॉक्टरों की दो घंटे की हड़ताल ने मरीजों की परेशानियां बढ़ा दीं। सिविल अस्पताल में कोई बुखार से परेशान रहा तो कोई आंखों की दिक्कत झेलता रहा। हड़ताल का समय खत्म होते ही डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया तो लाइनें लग गईं। जल्द दिखाने की होड़ में कोरोना गाइड लाइन की धज्जियां भी उड़ती रहीं।
शुक्रवार की सुबह सिविल अस्पताल में उपचार के लिए आए मरीजों को डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से 9 से 11 बजे तक दिक्कत झेलनी पड़ी। इस दौरान इमरजेंसी उपचार और पर्चा बनाने का काउंटर बदस्तूर जारी रहा फिर भी ओपीडी में रोगी दो घंटे तक इंतजार करते रहे। जब डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया तो ओपीडी में लंबी कतारें लग गईं । आम दिनों की तरह अस्पताल में सुबह आठ बजे से ही रोगियों का ओपीडी में आना शुरू हो गया। पर्चा बनवाने के बाद मरीज डॉक्टरों को दिखाने के लिए लाइन में लग लए। जब डॉक्टर नहीं आए तब पूछताछ करने पर मरीजों को पता चला कि डॉक्टर दो घंटे की हड़ताल पर हैं। इसके बाद मरीज और तीमारदार परेशान होने लगे। सबसे ज्यादा दिक्कत बच्चों को लेकर आए परिजनों को हुई।
हड़ताल खत्म होने का इंतजार करते रहे लोग
मेरे बेटे अवनीश की आंख में तकलीफ होने की वजह से जल्द दिखाने के लिए घर से चले थे। पर्चा भी सुबह साढ़े आठ बजे बनवा लिया। अब हड़ताल खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं।
- सुमन, मायना
बुखार होने की वजह से डॉक्टरों को दिखाने के लिए आए थे। सोचा था कि जल्द दिखाकर दवा ले लेंगे मगर यहां तो घंटों इंतजार करना पड़ा।
- सुमन, सेक्टर-तीन
मेरे बेटे हिमांशु को रात में बुखार आ गया था, जिसे दिखाने के लिए सुबह ही आ गए थे। पर्चा बनवा लिया मगर हड़ताल होने की वजह से पता चला कि डॉक्टर 11 बजे बाद देखेंगे और बच्चा परेशान हैं।
- स्वाति, हिसार रोड
जांच के लिए ब्लड का सैंपल दिया था, जिसकी रिपोर्ट लेने के लिए सुबह बुलाया गया था। सुुबह आठ बजे से इंतजार कर रहे हैं मगर हड़ताल की वजह से रिपोर्ट देने वाले भी कोई नहीं है।
- रेखा, हिसार रोड
हड़ताल के दौरान मैं लगातार राउंड पर रहा। इमरजेंसी सेवाएं बदस्तूर जारी रहीं। इसकी वजह से कोई गंभीर स्थिति नहीं बनी। ओपीडी में आने वाले मरीजों को ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। दो घंटे की हड़ताल के बाद सभी मरीजों का उपचार किया गया।
- डॉ. जेएस पूनिया, सीएमओ
15 दिन में मांगें नहीं मानी तो डॉक्टर करेंगे सभी सेवाएं ठप
दिल्ली व बिहार की तर्ज पर वरिष्ठ मेडिकल ऑफिसर (एसएमओ) की सीधी भर्ती पर रोक, पीजी में 40 फीसदी कोटा आदि मांगों को लेकर सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने शुक्रवार को दो घंटे कलमबंद हड़ताल की। इस दौरान एलान किया कि यदि मांगों को प्रदेश सरकार ने 15 दिन में नहीं माना तो हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन की मीटिंग सीएम सिटी करनाल में होगी, जिसमें सभी सेवाएं ठप करने का फैसला लिया जा सकता है।
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. जसबीर सिंह परमार ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों की मांगों पर सरकार ध्यान नहीं दे रही हैं। प्रदेश में सीधे एसएमओ की भर्ती की जा रही है । वरिष्ठता के आधार पर कैडर मिलना चाहिए। दिल्ली, बिहार आदि राज्यों की तरह हरियाणा में भी एसएमओ की भर्ती होनी चाहिए। पीजी में पहले सरकारी डॉक्टर का 40 फीसदी कोटा था, जो 2017 में एमसीआई की गाइड लाइन पर कम कर दी गई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने मांगों को 15 दिन में नहीं माना तो एसोसिएशन की जनरल बॉडी की मीटिंग करनाल में बुलाई जाएगी, जिसमें प्रदेश के करीब 2500 डॉक्टर शामिल होंगे। मांगें पूरी नहीं होने पर एकजुटता के पूरी तरह से कामबंद हड़ताल का एलान किया जाएगा। इसमें न कोई इमरजेंसी सेवा चलेगी और न कोई काम होगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में एसएमओ की सीधी भर्ती रोक दी गई थी, जिसे अब फिर शुरू कर दिया गया है। डॉक्टरों को जीवन में एसएमओ पद पर एक ही पदोन्नति मिलती है। सीधे एसएमओ भर्ती हुए डॉक्टर सीएमओ पद तक पहुंच जाते हैं।