जिले में डेंगू का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। सोमवार को तीन और डेंगू केसों की पुष्टि हुई। इसके साथ ही जिले में डेंगू का आंकड़ा 210 पहुंच गया है। ये केस कलानौर, निंदाना व काठमंडी में मिले हैं। विभाग ने इलाकों में फोगिंग के निर्देश जारी कर दिए हैं। साथ ही विभाग की टीमों को 72 जगह पर लार्वा मिला। टीम ने संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर दिया है। इधर, नगर निगम की टीम ने सोमवर को आजादगढ़, विशाल नगर वार्ड नंबर आठ व वार्ड नंबर 22 में फॉगिंग कराई।
रैपिड कार्ड टेस्ट: यह डेंगू जांच की त्वरित विधि है। इसके तहत पहले से तैयार रसायनयुक्त पट्टी पर रक्त की बूंदे डाली जाती हैं। इसके बाद पट्टी पर लगा रसायन डेंगू होने या नहीं होने की पुष्टि करता है। इसके परिणाम शत प्रतिशत नहीं होते हैं। इसलिए यह अधिक विश्वसनीय नहीं है। डब्ल्यूएचओ की ओर से यह अमान्य है।
एलाइजा टेस्ट: डेंगू की पुष्टि के लिए एलाइजा जांच जरूरी है। एलाइजा जांच में पॉजिटिव पाए जाने पर ही डॉक्टर डेंगू पीड़ित मरीजों का इलाज करते हैं। यह सुविधा सिविल अस्पताल व पीजीआईएमएस में ही होता है। एलाइजा रीडर मशीन पर रिजेंट के जरिए मरीजे के ब्लड सैंपल जांचे जाते हैं। मशीन एक बार में 90 सैंपल जांच सकती है। इसके परिणाम शत प्रतिशत होते हैं। यही डेंगू पुष्टि के लिए मान्य है।
संस्थान में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। डेंगू प्रकोप में मरीजों के रैपिड कार्ड टेस्ट करने की बात सामने आई है। यह जांच अमान्य है। इस बारे में संबंधित विभाग को लिखा गया है। इसमें मरीजों पर किट खर्च या किसी तरह की परेशानी नहीं होने की बात कही गई है। साथ ही अधिकारियों की बैठक में बुलाई गई है। जल्दी ही समस्या का समाधान किया जाएगा। -डाॅ. कुंदन मित्तल, चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआईएमएस।