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Dengue Alert: अस्पतालों में कार्ड टेस्ट के भरोसे डेंगू पीड़ित; WHO के नियमानुसार अमान्य, मरीज कर रहे खर्च

Tue, 12 Sep 2023 09:08 AM IST
नवीन दलाल विकास सैनी, रोहतक (हरियाणा)

सार

रोहतक में में डेंगू का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। सोमवार को तीन और डेंगू केसों की पुष्टि हुई। इसके साथ ही जिले में डेंगू का आंकड़ा 210 पहुंच गया है। पीजीआईएमएस का आपातकालीन विभाग भी इन दिनों मरीजों से भरा रहता है। 
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पीजीआई राेहतक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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टाइगर (डेंगू फैलाने वाला मच्छर) के शिकार दोहरा दर्द सहने को विवश हैं। बुखार से ग्रस्त मरीज को पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (पीजीआईएमएस) में डेंगू जांच के लिए 250 से 400 रुपये जेब से खर्च करने पड़ रहे हैं। इसकी वजह आपातकालीन विभाग में डेंगू जांच किट नहीं होना है। यह किट मरीजों को बाहर से खरीद कर लाने के बाद ही इलाज मिल पाता है। हालांकि विश्व सस्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के नियमानुसार रेपिड कार्ड टेस्ट अमान्य है। इसके बावजूद धड़ल्ले से डेंगू जांच किट मरीजों से मंगवाई जा रही है।

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मरीज को बाजार से 250 से 400 रुपये में खरीदनी पड़ रही किट
जिले में डेंगू का प्रकोप बना हुआ है। अब तक 200 से अधिक डेंगू केसों की पुष्टि हो चुकी है। जबकि एक महिला की मौत हो चुकी है। यही नहीं, बुखार खासकर डेंगू लक्षण वाले के मरीजों की अस्पतालों में भरमार है। पीजीआईएमएस का आपातकालीन विभाग भी इन दिनों मरीजों से भरा रहता है। यहां रोजाना 400 से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। इनके बुखार की पहचान के लिए डेंगू व मलेरिया की जांच की जा रही है।

यह जांच रैपिड कार्ड के जरिए हो रही है। इसके लिए मरीजों को जांच किट बाजार से खरीद कर लानी पड़ रही है। ये किट 250 से 400 रुपये में मिल रही है। संस्थान में इन किटों की कोई व्यवस्था नहीं है। यही नहीं, डब्ल्यूएचओ भी रेपिड कार्ड टेस्ट को मान्यता नहीं देता है। इसके बावजूद पांच रुपये का कार्ड बनवाकर सरकारी अस्पताल में फ्री स्वास्थ्य लाभ पाने वाले मरीजों को अपनी जेब से 400 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।

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डेंगू के तीन केस और मिले, 210 हुआ जिले का आंकड़ा

जिले में डेंगू का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। सोमवार को तीन और डेंगू केसों की पुष्टि हुई। इसके साथ ही जिले में डेंगू का आंकड़ा 210 पहुंच गया है। ये केस कलानौर, निंदाना व काठमंडी में मिले हैं। विभाग ने इलाकों में फोगिंग के निर्देश जारी कर दिए हैं। साथ ही विभाग की टीमों को 72 जगह पर लार्वा मिला। टीम ने संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर दिया है। इधर, नगर निगम की टीम ने सोमवर को आजादगढ़, विशाल नगर वार्ड नंबर आठ व वार्ड नंबर 22 में फॉगिंग कराई।

जानें...रेपिड कार्ड टेस्ट और एलाइजा टेस्ट में क्या है अंतर

रैपिड कार्ड टेस्ट: यह डेंगू जांच की त्वरित विधि है। इसके तहत पहले से तैयार रसायनयुक्त पट्टी पर रक्त की बूंदे डाली जाती हैं। इसके बाद पट्टी पर लगा रसायन डेंगू होने या नहीं होने की पुष्टि करता है। इसके परिणाम शत प्रतिशत नहीं होते हैं। इसलिए यह अधिक विश्वसनीय नहीं है। डब्ल्यूएचओ की ओर से यह अमान्य है।

एलाइजा टेस्ट: डेंगू की पुष्टि के लिए एलाइजा जांच जरूरी है। एलाइजा जांच में पॉजिटिव पाए जाने पर ही डॉक्टर डेंगू पीड़ित मरीजों का इलाज करते हैं। यह सुविधा सिविल अस्पताल व पीजीआईएमएस में ही होता है। एलाइजा रीडर मशीन पर रिजेंट के जरिए मरीजे के ब्लड सैंपल जांचे जाते हैं। मशीन एक बार में 90 सैंपल जांच सकती है। इसके परिणाम शत प्रतिशत होते हैं। यही डेंगू पुष्टि के लिए मान्य है।
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अधिकारी के अनुसार

संस्थान में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। डेंगू प्रकोप में मरीजों के रैपिड कार्ड टेस्ट करने की बात सामने आई है। यह जांच अमान्य है। इस बारे में संबंधित विभाग को लिखा गया है। इसमें मरीजों पर किट खर्च या किसी तरह की परेशानी नहीं होने की बात कही गई है। साथ ही अधिकारियों की बैठक में बुलाई गई है। जल्दी ही समस्या का समाधान किया जाएगा। -डाॅ. कुंदन मित्तल, चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआईएमएस।
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