चीन में चल रहे एशियन गेम्स में रोहतक के रुड़की की बॉक्सर प्रवीण हुड्डा का शानदार प्रदर्शन रहा। क्वार्टर फाइनल में दाएं कंधे पर लगी चोट के साथ बुधवार को रिंग उतरी इस खिलाड़ी को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा। साथ ही उसका पदक का रंग बदलने का सपना भी रह गया। उसके कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा।
कोच सुधीर हुड्डा ने कहा कि प्रवीण ने अच्छा प्रदर्शन किया है। क्वार्टर फाइनल में उसके कंधे में चोट आ गई थी। बुधवार को हुए सेमिफाइनल में इसी चोट पर फिर से पंच लगा। इससे कंधे में फ्रेक्चर का अंदेशा है। चोट के कारण वह अपना बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई और सेमीफाइनल हार गई।
चीन से लौटकर पहले कराएगी कंधे की चोट का इलाज
प्रवीण चीन से लौटकर पहले अपने कंधे की चोट का इलाज कराएगी। इसके लिए उसे स्पोंसर कर रही कंपनी दिल्ली के एक अच्छे चिकित्सक से संपर्क कर समय ले रही है। देश पहुंचते ही पहले उसका इलाज कराया जाएगा। इससे उसे आराम करने का कुछ समय मिल जाएगा। उसके घुटने में भी चोट के कारण कुछ दिनों से तकलीफ थी। आराम के बाद वह ओलंपिक की तैयारी के लिए फिट होगी और बेहतर प्रदर्शन कर पाएगी। अब प्रवीण का अगला लक्ष्य ओलंपिक में पदक जीतना रहेगा।
मेहर सिंह अखाड़े के पहलवान सुनील ने कुश्ती में पदक का 23 साल का सूखा दूर किया
सोनीपत के गांव डबरपुर निवासी सुनील कुमार ने 87 किलो भार वर्ग ग्रीको रोमन कुश्ती में बुधवार को कांस्य पदक जीता। एशियन गेम में इस पहलवान ने दो-एक के अंतर से अपने प्रतिद्वंद्वी पहलवान को हरा कर जीत दर्ज की। इसके साथ ही रोहतक के मेहर सिंह अखाड़े के इस पहलवान ने पिछले 23 से कुश्ती में बने बने पदक के सूखे को भी दूर कर दिया है। साधारण परिवार से संबंध रखने वाला यह पहलवान रेलवे में टिकट चेकर है।
चीन के हांगझोउ में भारत के लिए कुश्ती में यह पहला पदक है। वर्ष 2010 में रविंदर ढिल्ला और सुनील राणा के बाद ग्रीको रोमन शैली में भारत का यह पहला पदक है।
कोच मनोज कुमार की तत्परता ने दिलाई बड़ी राहत
मुकाबले में रेफरी टीम ने विपक्षी पहलवान को गलती से दो अंक दे दिए थे। समय पर कोच मनोज कुमार ने चुनौती का सही निर्णय लिया। आखिकार ज्यूरी ने संज्ञान लिया और स्कोर बोर्ड में सुधार किया। इसका सीधा फायदा पहलवान सुनील को मिला और प्रतिद्वंद्वी पहलवान के दो अंक कम किए। यह मुकाबला सुनील ने 2-1 से जीात।