रेवाड़ी। जिले की अनाज मंडियों में सरकारी एजेंसियों की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं और सरसों की सरकारी खरीद शुरू होने के बावजूद एजेंसियों की झोली पूरी तरह नहीं भरी। खुला बाजार में इन दोनों फसलों का भाव किसानों को अच्छा मिल रहा है। केंद्र सरकार की ओर से इस बार के लिए एमएसपी क्रमश: गेहूं के लिए 2015 रुपये प्रति क्विंटल और सरसों के लिए 5050 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया हुआ है। बुधवार को रेवाड़ी की मंडी में किसानों का गेहूं 2086 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों 6654 रुपये प्रति क्विंटल और जौ 3050 रुपये प्रति क्विंटल भाव पर बिका।
जिले की रेवाड़ी, बावल और कोसली मंडियों में करीब एक माह से लगातार सरसों, एक सप्ताह से गेहूं और जौ फसल की खरीद चल रही है। मुख्य रूप से सरकारी खरीद एजेंसियों और व्यापारियों का ध्यान गेहूं और सरसों फसल की खरीद पर है। इस बार रेवाड़ी मंडी में सर्वाधिक 6910 रुपये प्रति क्विंटल तक सरसों बिक चुकी है, जबकि पिछले वर्ष सरसों का भाव 8 हजार रुपये प्रति क्विंटल से अधिक तक बोला गया, जिस पर खुले बाजार में धड़ाधड़ खरीद भी हुई। जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक अशोक रावत ने बताया कि जिले की मंडियों में रबी फसलों की खरीद चल रही है। सरसों की सरकारी खरीद अभी तक नहीं हुई जबकि गेहूं 700 मीट्रिक टन खरीद हो गई है।
उधर सरकार की ओर से खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक अशोक कुमार रावत को फसल खरीद को लेकर विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उसके बाद रावत भी मंडियों में फसल खरीद व्यवस्था पर अपनी निगरानी बनाए हुए हैं। इसके साथ ही सरकार ने सरसों की पहली अप्रैल से शुरू हुई सरकारी खरीद को लेकर भंडारण निगम और हैफेड को विभिन्न मंडियों में फसल खरीदने के लिए जिम्मेदारी सौंपी थी। रेवाड़ी और कोसली मंडी में तीन - तीन हैफेड और भंडारण निगम को यह जिम्मेदारी निभानी है जबकि बावल में भंडारण निगम अकेले यह सरसों खरीद करेगा।
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कोट
- कृषि विपणन बोर्ड ने सरकार के आदेश पर रबी फसलों की खरीद के लिए जरूरी व्यवस्थाएं करने की अपनी जिम्मेदारी का पूरी तरह ईमानदारी पूर्वक निर्वाह किया है। जब तक किसान अपनी फसल लेकर आएंगे, तब तक फसल खरीद होगी। गेहूं की खरीद अभी खुले बाजार में हो रही है। सरकारी एजेंसियां इन फसलों को निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
- नरेंद्र यादव, सचिव कृषि विपणन बोर्ड रेवाड़ी।
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कोट
हैफेड सरसों की निर्धारित एमएसपी पर खरीद करने के लिए तैयार है। किसान को जहां फायदा मिले, वहां वह अपनी फसल बेचने को स्वतंत्र है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की सरकार में यह सुविधा किसानों को मिली है।
- संतराम, जिला प्रबंधक हैफेड।