संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिले में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के नियमों का पालन हाेता नहीं दिख रहा है। प्रतिबंध के बावजूद दिवाली पर जमकर आतिशबाजी हुई। इससे एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) भी खतरनाक श्रेणी में 343 पर पहुंच गया है। दिवाली के दिन सुबह 11 बजे एक्यूआई 193 दर्ज किया गया था, वहीं रात 10 बजे तक यह बढ़कर 228 पर पहुंच गया। बाद में यह 343 तक पहुंच गया है। आतिशबाजी के कारण निकलने वाले धुएं से सांस लेने से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं का स्वास्थ्य भी खराब हो रहा है। सबसे अधिक परेशानी दमा के मरीजों को झेलनी पड़ी। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से एयर क्वालिटी इंडेक्स को देखते हुए पटाखों पर बैन लगाया गया था और जिला पुलिस को सतर्क किया गया था। इसके बाद भी लोग घरों और दुकानों के सामने स्टॉल लगाकर पटाखे बेचते दिखाई दिए। दिवाली की शाम को शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आतिशबाजी होनी शुरू हो गई। पूरी रात लोग तरह तरह के पटाखों को जलाकर खुशी मनाते रहे।
ग्रैप के नियम बेअसर
एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण करने के लिए लागू किए गए ग्रैप के नियमों की धज्जियां उड़ती दिखाई दे रही हैं। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) की ओर से भले ही दिवाली पर पटाखों पर प्रतिबंध लगाया गया हो, लेकिन पर्व पर जमकर आतिशबाजी हुई। इसका असर यह रहा है कि एयर क्वालिटी इंडेक्स खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। हालांकि हवा में प्रदूषण होने के पीछे केवल आतिशबाजी को कारक नहीं माना जा सकता है, प्रशासनिक अव्यवस्था भी इसकी बड़ी जिम्मेदार है।
सेक्टर-3, 4 और एक में उखाड़ी सड़कों से भी फूल रहे फेफड़े
आमतौर पर किसानों व दीपोत्सव को बढ़ते प्रदूषण का कारक मानकर इनको जिम्मेदार ठहराते हुए तमाम पाबंदियां लागू कर दी जाती हैं, परंतु नगर परिषद की ओर से शहर के सेक्टर 3, 4 व एक की सड़कों को ठेकेदार की ओर से उखाड़ दिया गया है। ऐसे में इन सड़कों से उड़ती धूल जानलेवा साबित हो सकती है। लोगों का कहना है कि नवंबर में प्रदूषण का स्तर बढ़ता है। ऐसे में इन सड़कों को क्यों उखाड़ा गया है। तीन साल से इन सड़कों के गड्ढों को लोग झेल रहे हैं तो अब इतनी जल्दबाजी क्या थी, इसका भी जिम्मेदार अथॉरिटी को जवाब देना चाहिए।
वायु में प्रदूषण का स्तर 0 से 50 तक होना चाहिए, जबकि संतोषजनक श्रेणी में यह सूचकांक 51 से 100 के बीच माना गया है। 101 से 200 तक चिंताजनक कहा जा सकता है। इसी प्रकार 200 से 300 के बीच वायु में सूचकांक का होना नुकसानदायक माना जाता है, जबकि 301 से 400 तक खतरनाक व 401 से ऊपर के स्तर को अत्यंत घातक की श्रेणी में रखा गया है। चिकित्सकों के अनुसार 200 से ऊपर वायु प्रदूषण का स्तर बच्चों व बुजुर्गों के साथ हृदय व श्वास रोगियों के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है।