शहर एक बार फिर से गैंगवार की चपेट में है। पिछले कुछ दिनों में कई कुख्यात और उनके गुर्गों के जेल से पैरोल, जमानत या फरार होने के चलते गैंगवार बढ़ने की उम्मीद और भी ज्यादा हो गई है। मसला महज गैंगवार का नहीं है बल्कि गैंगों खुद के वर्चस्व को स्थापित करने के लिए शहर में बने गैंग व्यापारियों या अन्य पूंजीपतियों को भी निशाना बनाते हैं। शुक्रवार रात झोटा गैंग के एक बदमाश की पीट-पीटकर हत्या और दूसरे को अधरमा करने के बाद एक बार फिर से शहरवासी खौफ के साये में जी रहे हैं। सड़कों पर एक बार फिर से अजीब सी खामोशी फैल गई है। अंधेरा होते-होते तो आलम यह हो जाता है कि शहर के मुख्य बाजारों की लगभग सभी दुकानें बंद हो जाती हैं। महज दो हफ्तों बाद होली का त्योहार होने के बावजूद अपराधियों के बाहर होने से एक बार फिर से पसरने लगा है।
शहर के चार मुख्य गैंग और डॉक्टर हैं मुसीबत
शहर में हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, लूट, गैंगवार जैसी बड़ी वारदातों में शहर के चार मुख्य गैंग्स के नाम सामने आते हैं। आलू गैंग, झोटा गैंग, जीता गैंग, ततारपुरिया गैंग और कुलदीप उर्फ डॉक्टर का गैंग। इन सभी गैंग्स में दस से पंद्रह गुर्गे हैं जो आए दिन शहर में रंगदारी, फायरिंग, लूट, हत्या या हत्या के प्रयास जैसी वारदातों को अंजाम देते हैं। पुलिस के लिए परेशानी का सबब यह है कि इस समय अधिकांश गैंग्स के गुर्गे जमानत, पेरोल पर बाहर हैं या फिर किसी तरह फरार होने में कामयाब हो गए हैं।
किस गैंग की वर्तमान में क्या है स्थिति
झोटा गैंग: राजकुमार उर्फ झोटा खुद अपने गैंग का ऑपरेटर है। इस पर हत्या के प्रयास, रंगदारी, लूट, फिरौती जैसे संगीन मामलों में डेढ़ दर्जन से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं और फिलहाल जमानत पर बाहर है।हाल के दिनों में सबसे ज्यादा गैंगवाव्र और अन्य आपराधिक वारदातों की आशंका झोटा के ही बाहर होने से ही है। इसके गैंग से प्रदीप सोनी समेत कुछ अन्य गुर्गे भी बाहर हैं। दो दिन पहले ही झोटा गैंग के संजय उर्फ चवन्नी की पीट-पीटकर हत्या हुई, जबकि एक अन्य गुर्गे देवेंद्र को बेदम कर दिया गया था। झोटा के जेल में होने पर गैंग को चलाने वाला अर्जुन उर्फ मिक्का सूत्रों के अनुसार फिलहाल झोटा से अलग है।
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डॉक्टर गैंग: कुलदीप उर्फ डॉक्टर खुद अपने गैंग का ऑपरेटर मूल रूप से महेंद्रगढ़ के इस बदमाश पर हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, रंगदारी जैसे दो दर्जन के करीब मामले हैं और फिलहाल फरार है। नवदीप ज्वैलर्स से 5 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगने और न देने पर फायरिंग में यह और इसके गुर्गे शामिल थे। इसके गुर्गों में से ही लीलू ततारपुरिया और हवा सिंह ने अलग गैंग बना ली।
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आलू गैंग: अगस्त 2014 में रवि उर्फ आलू की गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद भी गैंग की गतिविधियों में कुछ खास कमी नहीं आई। आलू गैंग पर ही शुक्रवार रात झोटा गैंग के एक गुर्गे की हत्या करने और दूसके की हत्या के प्रयास का मामला दर्ज हुआ है। जिन लोगों को हत्या और हत्या के प्रयास में नामजद किया है उनमें आलू का भाई सुनील बाल्मीकि, दूसरा भाई योगेश उर्फ भोटा, अरुण, पवन, चेतन, सन्नी, तरुण कुमार, बीरेंद्र उर्फ बिंदर हैं। सूत्रों के अनुसार आलू गैंग को उनके भाई ही चला रहे हैं। योगेश जहां हत्या के मामले में शनिवार को ही गिरफ्तार हुआ वहीं सुनील फरार है। सुनील हत्या के कई मामलों में बरी हो चुका है। इसके अलावा लगभग सभी जेल से बाहर हैं।
जीता गैंग: फरवरी 2014 में कुख्यात जीता गुर्जर की कोर्ट कैंपस में ही गोली से छलनी कर हत्या कर दी गई थी। फिलहाल गैंग अभी भी चल रहा है। गैंग का मुख्य होशियार सिंह जमानत पर बाहर है। होशियार का नाम 2010 में 84 गांव के उप प्रधान बखाबुर सरपंच रामकुमार की हत्या के मामले में ासामने आया था। इस पर डकैती, लूट, हत्या, हत्या के प्रयास समेत कई संगीन धाराओं के दर्जन भर मुकदमे दर्ज हैं। इसके अलावा जीता गुर्जर के मर्डर में मुखबिरी के शक पर दो दिन बाद ही संदीप गुर्जर की हत्या करने वाले महावीर उर्फ लाला पर भी कई मामले हैं। यह भी जमानत पर है। राजू उर्फ सिकरा फिलहाल जेल में है।
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ततारपुरिया गैंग: कभी कुलदीप उर्फ डॉक्टर के साथ मिलकर कई वारदात को अंजाम देने वाले लीलू ततारपुरिया और हवा सिंह ने कुछ समय पहले ही एक अलग गैंग बना ली। दोनों ने नितिन उर्फ डब्लू और अन्य साथियों के साथ मिलकर कनिष्क होटल के मालिक से रंगदारी मांगी। इसके अलावा पिछले साल अजीज गारमेंट्स पर रंगदारी मांगने और फायरिंग करने और फिर एक्सपोर्ट हाउस के मालिक से एक करोड़ की रंगदारी मांगने के बाद लीलू और उसकी गैंग चर्चा में आई। फिलहाल तो ये नारनौल जैल में बंद हैं। लेकिन यह गैंग भी पुलिस के लिए चिंता का सबब है।
गैंग्स की कुछ बड़ी वारदात
2010 : बखापुर 84 गांव के उप प्रधान की हत्या।
29 सितंबर 2011: बागड़ी सुनार के यहां 2.5 करोड़ की डकैती।
11 फरवरी 2014: कुख्यात जीता गुर्जर की कोर्ट कैंपस में गोलियों से भूनकर हत्या।
मई 2014: कुख्यात अक्कू गुर्जर की नाईवाली चौक पर पीट-पीटकर हत्या।
23 अगस्त 2014: रवि उर्फ आलू की गोलियों से छलनी कर हत्या।
01 जून 2015: नवदीप ज्वैलर्स से 5 करोड़ की रंगदारी मांगी, अगले दिन फायरिंग।
-2016 : पार्षद के भाई से असलहे के बल पर रंगदारी मांगी गई।
-पिछले साल ही अजीज गारमेंट्स और कनिष्क होटल मालिक से लाखों की रंगदारी मांगी।
-एक्सपोर्ट हाउस के मालिक को फोन पर जान से मारने की धमकी देते हुए ततापुरिया गैंग ने 1 करोड़ की रंगदारी मांगी।
होली के आने वाले त्योहार के चलते व्यापारियों में डर
होली का त्योहार सिर पर है। बावजूद इसके मार्केट में वो चहल-पहल नहीं दिख रही है जो कि त्योहार के दौरान होनी चाहिए। बदमाशों के जेल से बाहर होने के चलते व्यापारियों में डर का माहौल है और मुख्य मार्केट की दुकानें अंधेरा होते-होते बंद होने लगती हैं। वहीं ज्वैलर्स शॉप्स पर तो शाम के सात बजे ताले लग जाते हैं। खौफ महज व्यापारियों तक ही सीमित नहीं है। आमजनों, पूंजीपतियों और राहगीरों में सबसे ज्यादा डर का माहौल है। इसके अलावा इन गैंग्स से ही जुड़े कुछ लोग संजय गांधी पार्क, नेहरू पार्क और राव तुलाराम पार्क में घूमने आने वाले लोगों को भी अपना शिकार बनाते रहे हैं।
-पॉजीटिव प्वाइंट: पुलिस कर रही अपना काम
कोर्ट से जमानत, पैरोल पर या फिर किसी तरह जेल से भले ही बदमाश भागकर वारदातों को अंजाम देते हैं। हालांकि, शहरवासियों के लिए अच्छी खबर यह है कि पुलिस बदमाशों पर नकेल कसने में काफी हद तक सफल रही है। पिछले दिनों में वारदातों के फौरन बाद पुलिस ने लीलू ततारपुरिया, हवा सिंह, राजकुमार उर्फ झोटा समेत कई बदमाशों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। शुक्रवार रात हत्या के बाद भी पुलिस ने तत्काल तीन हत्यारोपियों को गिरफ्तार किया।
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पुलिस का प्रयास शहर में पूरी तरह शांति का माहौल बनाने का है। वारदात को रोकने की पूरी कोशिश रहती है। बावजूद इसके वारदात हो जाती है तो आरोपियों को पकड़ने में पुलिस ज्यादातर मामलों में सफल रही है। जल्द ही सभी बदमाश सलाखों के पीछे भेजे जाएंगे।
-मोहम्मद जमाल, डीएसपी सिटी, रेवाड़ी