पानीपत। लगभग सभी पार्षद दोनों विधायकों की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट हैं। अब पार्षद एकजुट होकर अपनी व जनता की समस्याओं को सीधे सीएम के सामने रखेंगे। ये फैसला शनिवार को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में एक बैठक के दौरान शहर के कुल 26 में से 23 पार्षदों ने मिलकर लिया है। खास बात ये रही कि इस बैठक में न तो शहरी एवं ग्रामीण विधायक को बुलाया गया और न ही मेयर व सीनियर डिप्टी मेयर को शामिल किया गया। इसमें सिर्फ शहर के सभी पार्षदों को न्योता भेजा गया। जिससे सभी पार्षद एकजुट होकर सीएम से मिलने के फैसले पर अपनी सहमति और नेताओं को अपनी नाराजगी की बगावत का संदेश दे सकें। पार्षदों की इस बैठक ने एक बार फिर से शहर की राजनीति को तो गरमा ही दिया है, साथ में विधायकों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस बैठक में मुख्य रूप से चार एजेंडे को शामिल किया गया। इनमें निंबरी डंपिग स्टेशन के काम और उसके किए जाने वाले भुगतान, स्ट्रीट लाइट, शहर की चार जोन में सफाई के टेंडर और एडहॉक कमेटियां के गठन को शामिल किया गया। इसे लेकर पार्षदों ने जल्द से जल्द हाउस की मीटिंग बुलाने का निर्णय किया है। जिसमें वे एक बार फिर से निगम पर अपनी बयान बाजियों से इन मुद्दों को उठाएंगे और अधिकारियों से जवाब तलब करेंगे। इसके बाद भी समाधान नहीं निकला तो पार्षद सीधे सीएम मनोहर लाल के सामने इन समस्याओं को रखेंगे। हाउस की बैठक में भी इन मुद्दों के अलावा तब तक कोई एजेंडा नहीं रखा जाएगा जब तक अधिकारी इन एजेंडों पर अपनी प्रतिक्रिया देकर पार्षदों के सवालों के जवाब नहीं दे देते।
इन मुद्दों पर बनी सीएम से मिलने की सहमति
- स्ट्रीट लाइट
शहर में नई और पुरानी स्ट्रीट लाइट इंस्टॉल करवाने और रिपयेर करवाने के काम पर करीब साढ़े 6 करोड़ रुपये का खर्च किया जा रहा है। एक साल से ज्यादा समय होने के बाद भी लाइटों का काम पूरा नहीं हो पाया है। इससे पहले भी लाइटों में करोड़ों रुपये का घोटाला पकड़ा गया था। अब भी नई लाइटें डिब्बों में ही पैक हैं। नई लाइटों को लगवाने से लेकर पुरानी लाइटों को ठीक करवाने तक में गड़बड़ झाले के आरोप लगते आ रहे हैं। दूसरा दिवाली आने को है लेकिन अब तक शहर से अंधेरा नहीं मिट सका है। नेताओं के बार-बार हस्तक्षेप के बाद भी काम पूरा न होने से पार्षद असंतुष्ट हैं।
कूड़ा प्रथक्करण
गांव निंबरी में कूड़ा पृथक्करण के लिए निगम ने 48 करोड़ रुपये का टेंडर लगाया था। जिसे बाद में 20 करोड़ तक घटाते हुए 28 करोड़ रुपये तक का किया गया। इस पर पार्षदों ने हंगामा भी किया और मौके का दौरा भी किया। पार्षदों का कहना था कि ये करोड़ों रुपये का भार निगम के ऊपर बेवजह थोपा जा रहा है। इसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन निगम अधिकारी गुपचुप तरीके से एजेंसी की पेमेंट करने का प्लान बना रहे हैं। जिसके खिलाफ शहर के सभी पार्षद हैं। आरोप है कि लिजेसी वेस्ट में निगम ये भी तय नहीं कर पा रहा है कि कूड़े के ढेर में कौन सा कूड़ा पुराना है और कौन सा नया। किसकी पेमेंट होगी और किसकी नहीं।
- एडहॉक कमेटी
नगर निगम का चुनाव हुए 3 साल पूर होने को हैं लेकिन अब तक निगम की एडहॉक कमेटियों का गठन नहीं किया जा सका है। इससे शहर की सत्ता का केंद्रीयकरण हो रहा है। सत्ता शहर के कुछ लोगों के हाथों में ही रह गई है। मेयर के अनुसार उनकी तरफ से विधायक को पार्षदों के नामों की लिस्ट सौंपी जा चुकी है। लेकिन अब तक विधायक की तरफ से एडहॉक कमेटियों का गठन नहीं किया जा सका है। जिससे शहर की जनता भी परेशान हो रही है और विकास का पहिया भी थम चुका है। इससे पार्षदों में गहरा रोष है।
- शहर में चार जोन से सफाई
सभी पार्षदों ने मिलकर शहर की सफाई के सभी टेंडरों को रद्द करवाने का फैसला लिया था। जिसका समय पूरा हो जाए उस टेंडर को बढ़ाने की वजह से दोबारा से लगवाने की सहमति बनाई थी। इसके बाद शहर को चार जोन में बांटकर सफाई करवाने का प्लान बनाया था लेकिन अब तक ये काम सिरे नहीं चढ़ा है। नए टेंडर न लगने तक पुराने टेंडरों को ही बढ़ाया जा रहा है। इस पर हाउस की बैठक में विचार विमर्श कर नया फैसला लिया जा सकता है। जिसमें निगम से उनकी औपचारिकताओं को पटल पर रखा जाएगा।