पानीपत। सरकार के वाटर रिसोर्सेज अथॉरिटी का गठन के बाद सेक्टर-29 पार्ट-2 के 450 उद्यमियों को एनओसी देने से इनकार कर दिया है। सरकार का कहना है कि जहां नहरी पानी दिया जा रहा है, वहां भूजल दोहन की अनुमति नहीं दी जाएगी। उद्यमियों को भूजल का दोहन न करने के लिए अल्टीमेटम भी दिया जा चुका है।
जनवरी 2021 में सेक्टर-29 पार्ट-2 में नहर से पाइप लाइन दबाने का काम पूरा हो गया था। सितंबर तक पूरे सेक्टर में नहरी पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई थी। यहां 200 उद्योगों में पानी आपूर्ति किया जा रहा है। 150 उद्योगों ने अब तक कनेक्शन नहीं लिया है। पानीपत के उद्यमी पिछले 10 साल से तमिलनाडु की तर्ज पर प्रदेश में राज्य प्राधिकरण के गठन की मांग कर रहे थे, क्योंकि केंद्रीय भूजल प्राधिकरण से अनुमति लेने की प्रक्रिया काफी जटिल थी। देश भर से यहां आवेदन आते हैं, इसलिए अनुमति लेना काफी मुश्किल हो रहा था। फिलहाल 250 उद्योगों को एनओसी मिल चुकी है।
110 इंडस्ट्री को क्लोजर नोटिस जारी किया
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय भूजल बोर्ड इन दिनों जल दोहन और पर्यावरण प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्री पर लगातार कार्रवाई कर रहा है। अब तक करीब 110 इंडस्ट्री में खामियां मिलने पर क्लोजर नोटिस थमाए जा चुके हैं। इनमें से 30 प्रतिशत इंडस्ट्री पर अनुमति के बिना जल दोहन के तहत कार्रवाई की गई है। 31 अक्तूबर तक उद्यमी ऑनलाइन एनओसी के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद उद्यमियों को जुर्माना देना होगा।
महंगा मिल रहा है नहरी पानी : भीम
सीईटीपी के माध्यम से मिलने वाले रॉ वाटर की कीमत 17.37 रुपये प्रति लीटर है। उन्हें ये काफी महंगा पड़ रहा है। उत्पादन की लागत बहुत अधिक बढ़ रही है। अथॉरिटी ने सेक्टर 29 पार्ट टू में भू जल के दोहन के लिए एनओसी देने से इनकार कर दिया है। -भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन