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डेंगू व मलेरिया के मरीजों की जानकारी नहीं देने वाले निजी अस्पतालों पर होगी कार्रवाई

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निजी अस्पतालों ने अगर स्वास्थ्य विभाग को डेंगू और मलेरिया के मरीजों की जानकारी नहीं दी तो उन पर गाज गिर सकती है। डेंगू और मलेरिया को लेकर भय नहीं फैले, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से चेतावनी जारी की गई है। अगर निजी अस्पताल में कोई मरीज पॉजिटिव आता है तो उसकी रिपोर्ट और सैंपल जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग भेजने होंगे। सिविल अस्पताल में जांच के बार ही पुष्टि होगी कि किसी को मलेरिया या डेंगू है या नहीं।
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इस वक्त सिविल अस्पताल में भी डेंगू और मलेरिया की जांच कराने वाले वाले की संख्या दोगुनी हो गई है। अब सिविल अस्पताल में रोज 50-60 टेस्ट डेंगू एवं मलेरिया के हो रहे हैं। जिले की 120 लैब में हर रोज 2 हजार से अधिक टेस्ट हो रहे हैं। अब तक स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में डेंगू के पांच और मलेरिया के तीन केस ही आए हैं। निजी अस्पतालों के अनुसार ये संख्या 500 से अधिक है।
स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू की जांच की दर 600 रुपये निर्धारित की है। इससे अधिक राशि लेने वाले निजी अस्पतालों और निजी लैब कार्रवाई के दायरे में आ जाएंगे। डेंगू की जांच में एलाइजा टेस्ट के तरीके को ही माना जाएगा, इसके अलावा किसी अन्य तरह से जांच मान्य नहीं है।
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निजी अस्पतालों में अगर कोई डेंगू व मलेरिया का मरीज आता है तो उसकी जानकारी उन्हें देनी होगी। उसकी रिपोर्ट भी सिविल अस्पताल में भेजनी होगी। कार्ड टेस्ट की रिपोर्ट मान्य नहीं है। इसके लिए कंफर्मेट्री टेस्ट होगा। डेंगू व मलेरिया का भय फैलाने वालों पर कार्रवाई होगी। लोगों से अपील है कि वो डेंगू व मलेरिया के खिलाफ जागरूक हों।
- डॉ. जितेंद्र कादियान, सीएमओ पानीपत।
साल 2017 में शहर के निजी अस्पतालों पर डेंगू एवं मलेरिया का भय दिखाकर लोगों को लूटने के आरोप लगे थे। डेंगू और मलेरिया की फर्जी रिपोर्ट तैयार की जा रहीं थीं। प्रतिदिन की ओपीडी 12 हजार पार हो गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने कई अस्पतालों को नोटिस जारी किए थे। उसके बाद से स्वास्थ्य विभाग सिर्फ अपनी ही रिपोर्ट पर भरोसा करता है।
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