पानीपत। नामुमकिन को बेवजह मुमकिन बनाने में प्रशासन बदतर व्यवस्था को जन्म दे देता है। इसका जीता-जागता उदाहरण हैं आंगनबाड़ी केंद्र। दावा ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) का है और करीब 60 फीसदी आंगनबाड़ियों में शौचालय ही नहीं हैं। बाकी 40 फीसदी आंगनबाड़ी सरकारी भूमि या सरकारी स्कूलों या अन्य परिसरों में चल रही हैं। इनमें शौचालय तो हैं, लेकिन ज्यादातर इस्तेमाल में नहीं हैं, क्योंकि उनके कनेक्शन ही नहीं हैं।
शौचालय के बिना नई शिक्षा नीति के तहत आंगनबाड़ियों को प्ले वे स्कूलों में तब्दील करना मुश्किल-सा लगता है। आंगनबाड़ी वर्कर्स ने बताया कि उनसे तो कहा जाता है कि 15 सौ रुपये किराये में शौचायल के साथ बड़ा हॉल लिया जाए, जहां बच्चे पढ़ाई के खेल सकेंगे। इतने कम रुपये में शौचालय के साथ जगह नहीं मिलती। छोटी जगह मिलती है, जिसमें शौचालय नहीं होता है। शौचालय न होने से छोटे बच्चों को तो दिक्कत होती है, हमको भी समस्या का सामना करना पड़ता है।
मकान मालिक भी बढ़ा देता है साल में 10 फीसदी किराया
सामान्य तौर पर एक मकान मालिक भी हर साल किराए में 10 फीसदी की बढ़ोतरी कर देता है, लेकिन आंगनबाड़ियों के मामले में सरकार समझना नहीं चाहती। 1500 रुपये तक का किराया तो शहरी क्षेत्र में चल रहीं आंगनबाड़ियों के लिए है, ग्रामीण क्षेत्र यह 200 रुपये है। इनसे शौचालय युक्त हॉल कैसे संभव है। पानीपत शहर में इस वक्त एक सामान्य 144 वर्गफुट के शौचालय समेत कमरे का किराया चार हजार रुपये के आसपास है। जिसमें बिजली और पानी का खर्च अलग है।
वर्ष 2019 वर्ल्ड बैंक से मिली ग्रांट से आंगनबाड़ियों में बनने थे शौचालय
वर्ल्ड बैंक से मिली आर्थिक मदद पर वर्ष 2019 पंचायतों और आंगनबाड़ी केंद्रों में सामूहिक शौचालय बनाने की योजना थी। जिला प्रशासन ने सभी आंगनबाड़ी केंद्र प्रभारियों से भी रिपोर्ट मांगी थी कि किस आंगनबाड़ी केंद्र में शौचालय की जरूरत है और कहां पर इनके फिर से निर्माण की जरूरत है। आंगनबाड़ी वर्कर्स की मानें तो इसका फायदा उन्हीं आंगनबाड़ियों को मिला जो सरकारी जमीन पर बनीं थीं। जो करीब 40 प्रतिशत हैं।
किराए पर जगह लेकर जो आंगनबाड़ियां चल रहीं हैं, उनमें शौचालय नहीं है। दिक्कत यह है कि इतने कम किराए में शौचालय के साथ जगह नहीं मिलती है। दो साल पहले जो आंगनबाड़ी सरकारी जमीन पर चल रहीं थी, उनके लिए शौचालय बन गए, लेकिन सभी आंगनबाड़ियों में शौचालय नहीं है, इससे बहुत दिक्कत है।
- संतोष रावल, प्रधान एवं राज्य उप प्रधान, आंगनबाड़ी वर्कर्स एसोसिएशन