पानीपत। तहसील कैंप में रामनगर में गीजर से बनी गैस ने एक छात्र की जान ले ली। छात्र बाथरूम में नहा रहा था। गीजर से बनी कार्बन डाई ऑक्साइड व कार्बन मोनोक्साइड गैस से ये हादसा हुआ है। आधा घंटा बाद भी छात्र बाथरूम से नहाकर नहीं निकला तो परिजनों ने दरवाजा तोड़कर उसे बेसुध हालत में बाहर निकाला था।
सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने छात्र को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने हादसे की सूचना तहसील कैंप थाना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर परिजनों के बयानों पर शव का पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया। दो साल पहले मृतक छात्र के छोटे भाई की भी बीमारी से मौत हो गई थी।
राम नगर निवासी 17 वर्षीय पारस पुत्र विजय 11वीं कक्षा का छात्र था। विजय ने बताया कि पारस शनिवार सुबह स्कूल जाने के लिए साढ़े आठ बजे बाथरूम में नहाने के लिए गया था। 10 मिनट तक बाहर नहीं आया तो उसके बड़े बेटे सचिन ने दरवाजा खटखटाया और पारस को जल्द बाहर आने को कहा। सचिन दरवाजा खटखटाकर कमरे में चला गया। पारस आधे घंटे बाद भी बाथरूम से नहीं निकला तो उन्होंने दोबारा दरवाजा खटखटाया लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। उन्होंने दरवाजा तोड़ा तो पारस अर्धनग्न अवस्था में फर्श पर बेसुध पड़ा था। वो उसे आनन फानन में तहसील कैंप के निजी अस्पताल में ले गए, वहां से डॉक्टर ने उसे सिविल अस्पताल रेफर कर दिया। सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने जांच के बाद पारस को मृत घोषित कर दिया।
छोटे भाई की एक साल पहले बीमारी से हुई थी मौत
विजय ने बताया कि उसके तीन बेटे थे। बड़ा सचिन है। पारस मझला बेटा था। सबसे छोटे बेटे की एक साल पहले बीमारी के कारण मौत हो गई थी। आज पारस की भी मौत हो जाने के बाद बड़ा बेटा सचिन अकेला रह गया है।
बाथरूम में वेंटिलेशन नहीं था, इसलिए बनी गैस
दो साल पहले विजय ने बाथरूम में गीजर लगवाया था। बाथरूम में न तो वेंटिलेशन के लिए कोई जगह छोड़ी गई थी और न ही कोई खिड़की थी। इसलिए गीजर से निकलने वाली कार्बनडाईऑक्साइड व कार्बन मोनोक्साइड गैस एकत्रित हो गई। गैस के प्रभाव से पारस बेहोश हो गया और धड़कन रुक गई।
अगर गीजर लगवाया है तो वेंटिलेशन जरूर रखें : डॉ. अमित
लोगों से अपील है कि अगर बाथरूम में गीजर लगवाया है तो वेंटिलेशन के लिए जगह जरूर छोड़ें। खिड़की जरूर लगवाएं। गीजर से कार्बन डाईऑक्साइड व कार्बन मोनोक्साइड गैस निकलती है। छोटे बच्चों को दरवाजा बंद करके न नहाने दिया जाए। शहर में ऐसे कई बड़े हादसे हो चुके हैं।
-डॉ. अमित कुमार, डॉक्टर , सिविल अस्पताल