चंडीगढ़। उपयुक्त बीज उत्पादन कार्यक्रमों को अंतिम रूप देकर यह जिम्मेदारी हरियाणा राज्य बीज विकास निगम (एचएसडीसी), एचएलआरडीसी, इफ्को, एनएफएल, एनएससी व हैफेड को सौंपी गई है। यह फैसला हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय और राज्य में स्थित आईसीएआर संस्थानों के वैज्ञानिकों के परामर्श से किया गया। शुक्रवार को कृषि विभाग की एसीएस डॉ. सुमिता मिश्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया।
आगामी रबी फसल के सीजन 2021-22 में बीज उत्पादन और वितरण की समीक्षा की गई। समिति की बैठक रबी और खरीफ फसलों की बुवाई से पहले दो बार आयोजित की जाती है। उन्होंने बताया कि आगामी सीजन 2021-22 में बीज की कोई कमी नहीं है। प्रदेश में 21.99 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध है, जबकि 17.64 लाख क्विंटल बीज की मांग है। किसानों को नई किस्म अपनाने के लिए इन किस्मों के प्रमाणित बीजों की खरीद पर सब्सिडी प्रदान की जा रही है। गेहूं के बीज पर 1000 रुपये प्रति क्विंटल, जौ के बीज पर 1500, दलहन पर 2500 और तिलहन के बीज पर 4000 रुपये प्रति क्विंटल पर सब्सिडी दी जा रही है।
प्रवक्ता ने बताया कि बागवानी महानिदेशक और एचएयू को अपने ब्रांड के तहत प्रमुख सब्जी फसलों के लिए राज्य निर्मित संकर बीज का उत्पादन और प्रचार करने के लिए निर्देशित किया है। एक एक्शन प्लान अगले 2 सप्ताह में सरकार के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। प्रवक्ता ने बताया कि 3.10 लाख एकड़ भूमि के लिए किसानों को प्रमाणित सरसों बीज की मिनिकिट व 22,500 एकड़ के लिए हाइब्रिड सरसों बीज निशुल्क वितरित किया जाएगा।