पंचकूला। स्वच्छता सर्वेक्षण-2021 के परिणाम में पंचकूला को बड़ा झटका लगा है। पंचकूला ओवरऑल रैंकिंग में 488वें स्थान पर आया है। 1 से 10 लाख की जनसंख्या में पंचकूला ने 99वां स्थान पाया है जबकि, वर्ष-2020 में 81वां स्थान था। यहां पर भी पंचकूला का रैंक गिरा है। हरियाणा में भी पंचकूला लुढ़क कर पांचवें रैंक पर आ गया है, जोकि पिछले वर्ष तीसरे स्थान पर था। पंचकूला का रैंक गिरने के पीछे बड़ा कारण सही ढंग से अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा सफाई व्यवस्था सहित स्वच्छ सर्वेक्षण के मापदंडों के अनुसार काम ना करना माना जा रहा है।
केंद्रीय हाउसिंग एवं अर्बन अफेयर्स की तरफ से 2020 में जारी रैंकिंग में पंचकूला ओवरऑल 81वें स्थान पर पहुंच गया था। स्वच्छ भारत मिशन में नगर निगम पंचकूला ने भी भाग लिया और 2018 में 4302 शहरों में से पंचकूला 142वें पर पहुंच गया था। नगर निगम पंचकूला ने वर्ष 2019 में शानदार उछाल मारकर 4267 शहरों में से 71वां रैंक हासिल किया और वर्ष 2020 में 81वां स्थान हासिल किया था। बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्रालय द्वारा इस बार स्वच्छता रैंकिंग के लिए कुछ नियम कड़े कर दिए गए जिन पर खरा उतरने में पंचकूला असफल रहा और पंचकूला 99वें रैंक पर पहुंच गया है। पंचकूला की असफलता का एक सबसे बड़ा कारण शहर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट ना होना है, इस कारण पंचकूला के बहुत नंबर कट जाते हैं।
पिछले कई वर्षों से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का टेंडर लटका हुआ है। बार-बार इसकी तिथि बढ़ा दी जाती है, लेकिन अब तक टेंडर ना खुलने के कारण यह प्लांट नहीं लग पाया। पंचकूला के मेयर कुलभूषण गोयल ने कहा है कि पंचकूला में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने के लिए टेंडर दिसंबर में लगा है। यदि यह प्लांट लग जाता है तो पंचकूला को सीधे ही 1000 नंबर का फायदा होगा। इसके अलावा घर से कूड़ा लेकर उसका डंपिंग ग्राउंड तक सही ढंग से निस्तारण करने के लिए टेंडर लगाया जाएगा। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद पंचकूला की रैंकिंग में बहुत सुधार होगा। इस बार हमें अच्छा रैंक आने की उम्मीद थी, लेकिन जिन तकनीकी कारणों के कारण पंचकूला पिछड़ा है, उसकी समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों और कर्मचारियों को उनका समाधान करने के निर्देश दिए जाएंगे।