चंडीगढ़। हरियाणा के सभी जिला मुख्यालयों पर आधुनिक राजस्व रिकॉर्ड रूम अगले दो महीने में बनकर तैयार हो जाएंगे। सदियों पुराने राजस्व रिकॉर्ड को डिजिटल करने का काम काफी तेजी से चल रहा है। जल्द ही माउस के क्लिक पर ये रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध होगा।
वित्त आयुक्त और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजीव कौशल ने सभी डीसी के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये समीक्षा बैठक के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अभी राजस्व रिकॉर्ड को देखने और पता लगाने में काफी समय लगता है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल राजस्व कार्यालयों में रिकॉर्ड रूम को डिजिटाइज करने के लिए 77 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दी है। जिला स्तर पर आधुनिक रिकॉर्ड रूम बनाने के लिए 44 करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में राजस्व रिकॉर्ड में लाखों फाइलें हैं। कुछ तो 1870 से पहले की भी हैं। इन्हें राजस्व विभाग मैन्युअल रूप से रख रहा है। नई पहल के तहत महत्वपूर्ण राजस्व अभिलेखों व दस्तावेजों को स्कैन, सूचीबद्ध कर रहे हैं। आधुनिक रिकॉर्ड रूम में ये डिजिटल बॉक्स में रखी जाएंगी। इन अभिलेखों, दस्तावेजों को जरूरत के समय प्राप्त किया जा सकता है। अभी तक 92.92 प्रतिशत दस्तावेजों को स्कैन किया जा चुका है।
सीमा विवाद के संबंध में उत्तर प्रदेश के राजस्व सचिव से अगले कुछ दिनों में बैठक होगी। पंजाब के बलटाना और पंचकूला सीमा विवाद के संबंध में भी राजस्व सचिव से भी अगले कुछ दिनों में बैठक की जाएगी। बैठक के दौरान कौशल ने स्वामित्व योजना की समीक्षा भी की। उन्होंने डीसी को संपत्ति कार्ड बांटने के कार्य में तेजी लाने के लिए कहा।
सरकारी जमीन की मलकीयत में विभाग की जगह सरकार का नाम
कौशल ने बताया कि भूमि रिकॉर्ड के कॉलम में जमीन की मलकीयत में विभाग की जगह अब हरियाणा सरकार का नाम होगा, खाना काश्त के कॉलम में विभाग का नाम रहेगा। नगर निकायों और पंचायत की जमीन में नगर निकाय व पंचायत का नाम लिखा होगा। इस कार्य को पायलट आधार पर पंचकूला के बरवाला और फतेहाबाद में किया जा चुका है।
भूमि रिकॉर्ड में गैर जरूरी कॉलम
उन्होंने बताया कि डिजिटल तकनीक आने के बाद कुछ गैर जरूरी कॉलम को हटाने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। ये अपने सुझावों की रिपोर्ट अगले 15 दिनों में देगी। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकारी जमीन के व्यापक ब्योरा का कॉलम भी होना चाहिए ताकि जमीन में हुए निर्माण इत्यादि की स्थिति बताई जा सके।