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पंजाब मंत्रिमंडल की बैठक रविवार तक टली

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पंजाब मंत्रिमंडल की शनिवार 6 नवंबर को होने वाली बैठक स्थगित कर दी गई है। अब यह बैठक अगले दिन 7 नवंबर रविवार को दोपहर 12 बजे पंजाब सचिवालय में होगी। माना जा रहा था कि मंत्रिमंडल की इस बैठक में राज्य सरकार पेट्रोल और डीजल पर लागू वैट की दरों को घटाने का फैसला ले सकती है, लेकिन अब यह मामला और एक दिन के लिए टल गया है।
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उल्लेखनीय है कि राज्य के वित्त मंत्री बीते साढ़े चार साल के दौरान इन मुद्दों पर हमेशा खजाना खाली होने का हवाला देते रहे हैं। इसे देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि शनिवार को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक भी इसी वजह से स्थगित हुई है, क्योंकि वैट दरें घटाने पर सरकार में सहमति नहीं बन सकी है। वर्तमान में पंजाब में पेट्रोल की कीमत 105.92 रुपये और डीजल की कीमत 89.58 रुपये प्रति लीटर है, जो केंद्र सरकार द्वारा दोनों वस्तुओं पर क्रमश: 5 रुपये और 10 रुपये एक्साइज दर में कटौती के बाद लागू हुई है।
वहीं पंजाब से सटे हरियाणा, चंडीगढ़ और हिमाचल ने केंद्र के फैसले के बाद अपने-अपने राज्य में वैट दरों में भी कटौती की है, जिसके चलते हिमाचल में पेट्रोल 94.47 रुपये व डीजल 79.83 रुपये प्रति लीटर, हरियाणा में पेट्रोल 96.06 रुपये व 80.90 रुपये प्रति लीटर और चंडीगढ़ में पेट्रोल 94.23 रुपये व डीजल 86.53 रुपये लीटर हो गए हैं।
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वैट से पंजाब को मुनाफा ही मुनाफा
पंजाब सरकार को पेट्रोल व डीजल पर वैट से हो रही आमदनी के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो राज्य सरकार को इस साल अप्रैल से सितंबर तक इन दोनों पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री से 3776 करोड़ की आमदनी हुई है। यह आमदनी पिछले साल की आमदनी के मुकाबले 1439 करोड़ रुपये ज्यादा है। पिछले साल राज्य सरकार को इस अवधि के दौरान 2237 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी।
खास बात यह भी है कि कोविड से उभरी राज्य सरकार को सबसे ज्यादा आमदनी पेट्रोल और डीजल से ही हुई है। अब राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष के दौरान पेट्रोल-डीजल पर वैट से 6027 करोड़ रुपये की आमदनी का लक्ष्य तय किया है, और बीते नौ महीनों के दौरान 3776 करोड़ रुपये की कमाई हो भी चुकी है। लेकिन केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज दरों को घटाकर पंजाब सरकार के लिए नई मुश्किल खड़ी कर दी है। राज्य सरकार अगर अब वैट दरों में कटौती करती है तो उसे राजस्व की बड़ी हानि होगी। लेकिन वैट दरें घटाना राज्य सरकार की मजबूरी भी बन चुकी है, क्योंकि कांग्रेस सरकार किसान आंदोलन का समर्थन भी कर रही है और डीजल कृषि क्षेत्र की एक बड़ी जरूरत है।
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