केंद्र सरकार ने भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) में पंजाब और हरियाणा की स्थायी सदस्यता खत्म कर दी है। इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसे लेकर शुक्रवार को सूबे के सियासी नेताओं ने कई तरह की आशंकाएं जाहिर की हैं। पंजाब आम आदमी पार्टी के प्रधान भगवंत मान ने केंद्र के इस फैसले को पंजाब के अधिकारों पर एक और सीधा हमला करार दिया है तो पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान सुनील जाखड़ ने राज्य से सभी सियासी दलों के प्रमुखों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर केंद्र के अभिमानी और दबंग रवैये के खिलाफ एकजुट होने की अपील की है।
केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने 23 फरवरी को भाखड़ा-ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (संशोधन) नियम-2022 लागू किया है, जो भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड नियम 1974 का स्थान लेगा। इस संबंध में केंद्रीय मंत्रालय ने अधिसूचना भी जारी कर दी है, जिसके तहत बीबीएमबी से पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों की स्थायी सदस्यता समाप्त हो गई है। पुराने नियम के तहत बीबीएमबी का सदस्य, पावर पंजाब से और सदस्य, सिंचाई हरियाणा से होता था। लेकिन संशोधित नियम के बाद यह अनिवार्य नहीं रह गया है। पंजाब और हरियाणा की जगह अन्य राज्यों से भी सदस्य लिए जा सकेंगे। संशोधित नियमों के तहत सदस्यों के चयन के मापदंड भी ऐसे रखे गए हैं, जिन्हें पंजाब और हरियाणा के बिजली विभाग संबंधी अधिकारियों द्वारा पूरा कर पाना संभव नहीं है, जबकि दोनों सदस्य पंजाब और हरियाणा के इंजीनियरों के पैनल से लिए जाते थे।