गेस्ट टीचर्स को पक्का करने से पीछे हटने पर हुड्डा ने शिक्षा मंत्री को घेरा
- महिला गेस्ट टीचर्स के खून से लिखे पत्र को चिरंजीव ने सदन में लहराया
- किरण चौधरी ने आर्ट एंड क्राफ्ट शिक्षकों का मुद्दा भी शून्यकाल में उठाया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन शिक्षकों के मुद्दों की गूंज रही। गेस्ट टीचर्स को पक्का करने, सेवा नियम बनाने व मूल वेतन देने के मुद्दे को कांग्रेस विधायकों ने पुरजोर तरीके से सदन में उठाया। नियमितीकरण को लेकर नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा और शिक्षा मंत्री कंवर पाल के बीच खूब शब्दबाण चले। शून्यकाल के दौरान शिक्षकों से जुड़े मुद्दों पर सदन का माहौल गरम रहा। कांग्रेस विधायक चिरंजीव राव ने महिला गेस्ट टीचर्स के खून से लिखे मांग पत्र को सदन में लहराया। कांग्रेस विधायक किरण चौधरी ने गेस्ट टीचर्स को पक्का करने के साथ ही आर्ट एंड क्राफ्ट शिक्षकों की बहाली का मुद्दा उठाया। हुड्डा ने कंवर पाल को कहा कि गेस्ट टीचर्स को नियमित करने वाली पहली कलम कहां गई। इन्हें पक्का क्यों नहीं करते। शिक्षा मंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार ने उनकी नौकरी को सुरक्षित किया है। कांग्रेस सरकार के समय तो उनकी नौकरी जा रही थी। इन्हें समान काम-समान वेतन देने का कोई वादा नहीं किया था। सेवानिवृत्त होने पर इच्छुक गेस्ट टीचर्स को पुनर्नियुक्ति भी दी जाएगी। निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू ने कहा कि इन्हें सुविधा टैक्स दो या नियमित करो। कांग्रेस विधायक मामन खान ने इन्हें नियमित करने व मूल वेतन देने की मांग की। भाजपा विधायक लीला राम गुर्जर ने भी इन अध्यापकों को नियमित करने की बात सदन में रखी।
आर्ट एंड क्राफ्ट शिक्षकों का परिणाम संशोधित होगा
शिक्षा मंत्री ने कहा कि 31 जनवरी 2021 को आर्ट एंड क्राफ्ट शिक्षकों के पद भरने के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की थी। जिसमें 419 पूर्व आर्ट एंड क्राफ्ट शिक्षक भी शामिल हुए। जिनमें से चयन मानदंडों के अनुरूप 245 दस्तावेज जांच और 197 साक्षात्कार के लिए योग्य पाए गए। 14 नवंबर 2021 को घोषित परिणाम अनुसार उनमें से 78 का चयन हुआ। यह सर्वोच्च न्यायालय में लंबित केस के निपटारे की शर्तों को जोड़ते हुए जारी किया था। इस मामले में फैसला बीते 24 नवंबर को आ चुका है, उसके अनुसार परिणाम संशोधित किया जाएगा।
सरकार के मार्गदर्शन में विदेशों में पढ़ाई की कोई योजना नहीं : विज
हरियाणा के तकनीकी शिक्षा मंत्री अनिल विज ने कहा कि सरकार के मार्गदर्शन में बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए विदेशों में भेजने की कोई योजना तकनीकी शिक्षा विभाग में विचाराधीन नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020-21 से हरियाणा के सभी कॉलेजों के अंतिम वर्ष के छात्रों को विदेशी विश्वविद्यालयों में अध्ययन के लिए और उन्हें विदेशों में रोजगार के अवसरों के बारे में जागरूक करने को लिए मुफ्त पासपोर्ट दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गलत तरीकों से विदेश भेजने के मामले सामने आते हैं और इन कबूतरबाजों को पकड़ने के लिए भारती अरोड़ा की अध्यक्षता में एक एसआईटी गठित की गई, जिसके तहत 591 लोगों को गिरफ्तार किया गया है व 485 एफआईआर दर्ज की गई है। इनसे एक करोड़ 81 लाख 38 हजार 800 रुपये की राशि भी रिकवर की गई है। उन्होंने बताया कि तकनीकी शिक्षा विभाग हरियाणा में 44 ( 27 राजकीय बहुतकनीकी , 11 राजकीय सोसायटी बहुतकनीकी , 03 सरकार से सहायता प्राप्त बहुतकनीकी संस्थान 02- एमएसएमई के अधीन संस्थान (भारत सरकार तथा 01 बहुतकनीकी संस्थान भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, खानपुरकलां, सोनीपत) एवं 147 निजी बहुतकनीकी के माध्यम से 3/2 वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्त्रस्म द्वारा शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। हरियाणा की स्थापना के समय 6 बहुतकनीकी संस्थान 1341 छात्रों की क्षमता के साथ थे।
रजिस्ट्रार की नियुक्ति सरकार की सिफारिश से ही होगी, हुड्डा बोले- अपनी बात से मुकर रहे सीएम
चंडीगढ़। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने विधानसभा में कहा कि विश्वविद्यालयों में पूर्व की भांति उपकुलपति की नियुक्ति राज्यपाल के माध्यम से होगी। रजिस्ट्रार की नियुक्ति के लिए विवि स्तर पर समिति बनेगी जो तीन नाम का पैनल सरकार को भेजेगी। सरकार उनमें से एक नाम राज्यपाल को नियुक्ति के लिए सुझाएगी। ग्रुप बी पदों की परीक्षा के लिए एचपीएससी को मांग पत्र भेजना होगा। ग्रुप सी व डी के पदों की परीक्षा के लिए एचपीएससी को आग्रह भेजने का प्रावधान किया है। असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती परीक्षा एचपीएससी लेगा। नेता प्रतिपक्ष हुड्डा ने सदन में कहा कि मुख्यमंत्री अपनी बात से मुकर रहे हैं। उन्होंने बीते सत्र में कहा था कि विवि की भर्ती परीक्षा की जिम्मेदारी एचपीएससी, एचएसएससी को नहीं देंगे। विवि की स्वायत्तता अंग्रेजों के समय से चलती आ रही है। एक-दो राज्य का उदहारण देकर हरियाणा में इस विवि संशोधन विधेयक को जबरदस्ती थोपा जा रहा है। इसका छात्र और शिक्षक भी विरोध कर रहे हैं। अभी वक्त है, सरकार संभल जाए। ऐसा न हो कि कृषि कानूनों की तरह इस विधेयक को लेकर भी मुंह की खानी पड़े।