चंडीगढ़। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित पोर्टल शुरू किया है, जिस पर केवल प्राकृतिक किसान पंजीकृत होंगे। 50 ब्लॉक के तहत जो किसान अपना उत्पाद खुद बनाएंगे, उन्हें 35,000 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, बशर्ते पूर्व-आवश्यक शर्तों को पूरा किया जाना चाहिए।
शुक्रवार को वह गुजरात के राज्यपाल आचार्य के साथ हरियाणा निवास, चंडीगढ़ में हरियाणा में प्राकृतिक खेती कार्यक्रम के कार्यान्वयन की समीक्षा बैठक कर रहे थे। बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जेपी दलाल भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने मृदा स्वास्थ्य जांच पर विशेष जोर देते हुए सत्यापित प्रयोगशालाओं के माध्यम से प्राकृतिक खेती के प्रमाणीकरण पर बल दिया।
मनोहर लाल ने कहा कि विभाग द्वारा प्राकृतिक खेती की प्रामाणिकता की निगरानी पर जोर दिया जाए ताकि वास्तविक उत्पाद बाजार में आ सकें। उन्होंने विभाग के अधिकारियों को प्रत्येक जिले में 25-25 युवा किसानों को तैनात करने के निर्देश दिए, जिन्हें प्राकृतिक खेती में प्रामाणिक प्रशिक्षण दिया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि और अधिक नवीन तकनीकों का भी पता लगाया जाए।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (एटीएमए) के कर्मचारियों के प्रशिक्षण के बाद कार्यक्रम शुरू करने और उन्हें एचपी, गुजरात राज्य की प्राकृतिक खेती के मॉडल से परिचित कराने के भी निर्देश दिए। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि जैविक खेती से किसानों को ज्यादा लाभ नहीं हो रहा है, इसलिए सभी को प्राकृतिक खेती को अपनाना चाहिए। प्रशिक्षित किसान इस मिशन में शामिल होने के लिए अन्य लोगों के लिए प्रशिक्षक के रूप में कार्य करेंगे।
इस मौके पर एसीएस डॉ. सुमिता मिश्रा, कृषि विभाग के महानिदेशक डॉ. हरदीप सिंह, बागवानी विभाग के महानिदेशक डॉ. अर्जुन सिंह सैनी, शोधकर्ता और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।