पंचकूला। जिले की महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए पीजीआई और जीएमसीएच के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। क्योंकि 4 फरवरी को पंचकूला के नागरिक अस्पताल में कैंसर जागरूकता दिवस मनाया जा रहा है। इसी दिन से अस्पताल की पहली मंजिल पर महिलाएं अपना एचपीवी (ह्यूमन पेपिलोमावायरस) डीएनए टेस्ट करा सकती हैं। इसकी पुष्टि डॉ. सुलभा मित्तल आर्य ने की।
बता दें कि ह्यूमन पेपिलोमा वायरस 99 फीसदी मामलों में सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार है। यह टेस्ट एचपीवी की उपस्थिति का पता लगाने में मदद कर सकता है। एचपीवी का ज्यादा पता लगाने से आपको सर्वाइकल कैंसर के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, एचपीवी वायरस को कैंसर में बदलने में कम से कम करीब 10 साल लगते हैं। ऐसे में आपको निदान और उपचार के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।
दरसअल भारतीय महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौत का सबसे आम कारण सर्वाइकल कैंसर है? जी हां, लेकिन ये एक ऐसी तरह का कैंसर है, जिसका समय पर पता लगने पर बचाव और इलाज दोनों संभव हैं। हालांकि, आमतौर पर महिलाएं इस बीमारी के बारे में जागरूक नहीं होती हैं। आंकड़ों के अनुसार समय पर इलाज न मिलने पर 15 से 44 वर्ष की आयु की महिलाओं में ये कैंसर उनकी मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन रहा है, जबकि इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।
क्या है एचवीपी परीक्षण
एचपीवी परीक्षण गर्भाशय ग्रीवा से कोशिकाओं में एचपीवी से डीएनए की तलाश करता है। गर्भाशय ग्रीवा (गर्भ) का निचला हिस्सा है, जो योनि में खुलता है। एचपीवी एक यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) है जो ज्यादातर लोगों में अपने आप ही चला जाता है। यदि यह दूर नहीं किया जाता है तो एचपीवी असामान्य गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं का कारण बन सकता है जो सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकता है। कुछ प्रकार के एचपीवी से सर्वाइकल कैंसर होने की आशंका अधिक होती है। एचपीवी परीक्षण आपके डॉक्टर को बता सकता है कि क्या आपको एचपीवी है और यह किस प्रकार का है।
क्या है सर्वाइकल कैंसर
गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर (सर्वाइकल कैंसर) तब होता है जब कोशिकाएं गर्भाशय ग्रीवा (प्रवेश द्वार) के अस्तर में असामान्य रूप से विकसित होती हैं जो निचले गर्भाशय की गर्दन या संकीर्ण हिस्सा होता है। कम उम्र में कई यौन संबंध होने या यौन सक्रिय होने से गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के विकास की संभावना बढ़ जाती है। कैंसर के लक्षण जल्दी सामने आने पर जीवित रहने की संभावना ज्यादा होती है। आपका डॉक्टर एक निवारक उपाय के रूप में पैप टेस्ट करवाने की सलाह दे सकता है।
सर्वाइकल कैंसर का कारण
डॉ. सुलभा मित्तल आर्य ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर के ज्यादातर मामलों में हाई रिस्क ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण होता है। सामान्यत: एचपीवी के संपर्क में आने पर महिला के शरीर का इम्यून सिस्टम उस वायरस को किसी भी तरह का नुकसान करने से रोकता है। हालांकि कुछ महिलाओं का इम्यून सिस्टम उस वायरस को खत्म नहीं कर पाता है और बहुत ज्यादा समय तक हाई रिस्क एचपीवी के संपर्क में रहने से सर्वाइकल कैंसर का खतरा रहता है।
कैसे किया जाए बचाव
डॉ. सुलभा कहती हैं कि सर्वाइकल कैंसर के खतरे को कम करने के लिए एचपीवी से बचाव का टीका लगवाना चाहिए। 9 से 26 साल की उम्र की लड़कियों व महिलाओं के लिए टीका उपलब्ध है। टीके का सबसे ज्यादा प्रभाव तब होता है, जब यौन गतिविधियां शुरू होने से पहले ही लड़की को टीका लगवा दिया जाए। 9 से 14 साल की उम्र में दो इंजेक्शन के रूप में टीका लगाया जाता है और 14 से 26 की उम्र में तीन इंजेक्शन की जरूरत होती है। हालांकि टीके के बाद भी नियमित स्क्रीनिंग जरूरी है।