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भाकियू एकता-डकौंदा ने चुनाव लड़ने से किया इनकार

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चंडीगढ़। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जंग जीतने के बाद उत्साहित किसान संघर्ष मोर्चा के 32 में से 22 किसान संगठनों द्वारा एकजुट होकर पंजाब विधानसभा चुनाव-2022 में उतरने के फैसले को 48 घंटे में ही जोर का झटका लगा है। भारतीय किसान यूनियन-एकता (डकौंदा) ने चुनाव में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है और जत्थेबंदी के प्रधान बूटा सिंह बुर्जगिल ने यह भी एलान कर दिया है कि उनकी जत्थेबंदी किसी भी पार्टी या धड़े का समर्थन नहीं करेगी।
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किसान संघर्ष मोर्चा (एसकेएम) से जुड़ी 22 जत्थेबंदियों ने गत शनिवार को संयुक्त समाज मोर्चा (एसएसएम) का गठन कर पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने का एलान किया था। उस समय यह भी कहा गया था कि तीन अन्य जत्थेबंदियां भी जल्द ही एसएसएम के जुड़ेंगी, लेकिन दो दिन बाद सोमवार को एसएसएम से एक बड़ी जत्थेबंदी ने खुद को अलग कर लिया।
इस संबंध में जत्थेबंदी के सूबा महासचिव जगमोहन सिंह पटियाला ने बताया कि जत्थेबंदी के पूरे पंजाब के जिला प्रधानों व सचिवों से खुलकर विचार विमर्श करने के बाद सर्वसम्मति से भाकियू-एकता (डकौंदा) के संविधान अनुसार फैसला लिया गया कि जत्थेबंदी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगी और संयुक्त समाज मोर्चे का समर्थन भी नहीं किया जाएगा।
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किसान नेता मनजीत सिंह धनेर, गुरदीप सिंह रामपुरा, गुरमीत सिंह भट्टीवाल ने कहा कि जत्थेबंदी का दृढ़ विश्वास है कि संघर्ष के जोर पर ही किसानों की मांगों की प्राप्ति हो सकती है।
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