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कांग्रेस की राजनीति में फिर दोराहे पर भजनलाल परिवार

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चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस की राजनीति में भजनलाल परिवार एक बार फिर दोराहे पर है। प्रदेशाध्यक्ष न बनाए जाने से पूर्व मुख्यमंत्री के विधायक बेटे कुलदीप बिश्नोई पार्टी से नाराज हैं। उन्होंने पार्टी कार्यक्रमों से फिलहाल किनारा कर लिया है। प्रदेश कांग्रेस की कमान न सौंपने को लेकर उन्हें अभी तक पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से कोई जवाब नहीं मिला है, न ही मुलाकात तय हुई। बिश्नोई फिलहाल इंतजार करो और देखो की स्थिति में हैं।
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प्रदेश कांग्रेस प्रभारी विवेक बंसल से मुलाकात के बाद उनके तेवर कुछ नरम पड़े हैं। उन्होंने चुप्पी साध ली है, हालांकि समर्थकों और कार्यकर्ताओं का दबाव उन पर बढ़ता जा रहा है। ऐसे में जल्दी कोई बड़ा ओहदा न मिलने पर उनके सब्र का बांध टूट सकता है। बिश्नोई लंबे समय से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए लॉबिंग में जुटे थे। उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल सरीखे नेताओं से अनेक मुलाकात कर अपना पक्ष भी रखा। कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेशाध्यक्ष तो बदला, लेकिन कमान नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा के खेमे को सौंप दी, जिससे बिश्नोई और आहत हुए। उन्होंने 4 मई को नए प्रदेशाध्यक्ष उदयभान के पदभार ग्रहण कार्यक्रम में भी हिस्सा नहीं लिया। अब उन्हें राहुल गांधी के बुलावे का इंतजार है, उसके बाद ही वह अपना अगला कदम उठाएंगे। हालांकि, प्रदेश प्रभारी बंसल उनसे लगातार संपर्क में हैं। वह कह चुके हैं कि बिश्नोई खिन्न जरूर हैं, लेकिन पार्टी से दूर नहीं। बंसल के अनुसार जल्दी पूरे मामले को सुलझा लिया जाएगा।
भजनलाल ने 2007 में बनाई थी हजकां
कांग्रेस ने 2005 में भजनलाल के नेतृत्व में चुनाव लड़ा, लेकिन सीएम नहीं बनाया। इस पर उन्होंने 2 दिसंबर 2007 में हरियाणा जनहित कांग्रेस (बीएल) पार्टी बनाई। 2009 चुनाव में पार्टी के 6 विधायक जीते, 5 कांग्रेस में चले गए। जून 2011 में भजनलाल का निधन हो गया। कुलदीप ने भाजपा से गठबंधन कर लिया, वह भी 2014 में लोकसभा चुनाव के बाद टूट गया। हरियाणा जनचेतना पार्टी के साथ मिलकर 2014 में विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन कुलदीप व उनकी पत्नी रेणुका ही जीतीं। कुलदीप ने 2016 में हजकां का विलय कांग्रेस में कर दिया। कुलदीप वर्ष 1998 में कांग्रेस से आदमपुर से विधायक रह चुके हैं। अभी वह कांग्रेस से ही आदमपुर से विधायक हैं।
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हुड्डा को कमजोर करने के लिए विरोधी गुट ने लिखी थी पटकथा
पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर, किरण चौधरी और पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव 2014 के चुनाव के बाद लगातार हुड्डा को कमजोर करने के लिए अभियान छेड़े रहे। तंवर ने ही कुलदीप बिश्नोई को कांग्रेस में लाने की पटकथा लिखी थी। बिश्नोई कभी हुड्डा के साथ खुलकर खड़े नहीं हुए। उन्होंने अपनी अलग राह ही पकड़ी, लेकिन संगठन में हुए ताजा बदलाव में मात खा गए।
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