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रेलवे कॉलोनी में हत्या व डकैती डालने वाले तीन गिरफ्तार

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पलवल। दो फरवरी को रेलवे कॉलोनी में हुई हत्या व डकैती के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। मामले में संलिप्त तीनों बदमाशों को पुलिस ने दो देसी कट्टे, चार कारतूस व एक बाइक सहित गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने लूटपाट का विरोध करने पर 62 वर्षीय बुजुर्ग महिला की हत्या करने बाद नकदी, मोबाइल, एटीएम कार्ड व जेवरात लूट लिए थे। पकड़े गए बदमाशों में दो सगे भाई हैं, जो पहले भी दर्जनों वारदात कर चुके हैं। आरोपियों पर विभिन्न थानों में मुकदमे दर्ज हैं। दोनों भाई हाल ही में जेलों से छूट कर आए थे। बुधवार को डीएसपी मुख्यालय अनिल कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि आरोपियों को अदालत में पेश कर चार दिन की पुलिस रिमांड लिया गया है।
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डीएसपी अनिल कुमार ने बताया कि बीती दो फरवरी की सुबह साढे़ आठ बजे रेलवे कॉलोनी में 60 वर्षीय मीरा देवी की लूटपाट के बाद हत्या कर दी गई थी। मामले में मृतका के पति सुभाष चंद्र माथुर ने पुलिस को शिकायत दर्ज कराई थी। मामले में पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
डीएसपी ने बताया कि बुधवार की सुबह सीआइए शाखा में कार्यरत एएसआई हरवीर को सूचना मिली कि कुसलीपुर पुल के समीप तीन युवक अवैध हथियार के साथ मौजूद है। जिन्हें पकड़ लिया गया। बआरोपियों ने अपने नाम कैलाश नगर निवासी बिंटू, अरुण व संदीप बताए। बिंटू व अरुण सगे भाई हैं। आरोपियों ने पूछताछ के दौरान बताया कि उन्होंने ही बीती दो फरवरी को रेलवे कॉलोनी में बुजुर्ग की हत्या कर लूटपाट की थी।
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घर में महिला व छोटे बच्चों को निशाना बनाते थे आरोपी
पुलिस के अनुसार तीनों आरोपी पहले भी एक साथ मिलकर वारदात कर चुके हैं। लूटपाट की योजना बिंटू बनाता था। उसका भाई अरुण व संदीप रेकी का काम करते थे। इस बार आरोपियों ने अपने घर के समीप ही वारदात करने के लिए चुना। उन्होंने प्रिया के मकान का लूटपाट के लिए चयन किया और तीन दिन तक रेकी करने के बाद वारदात को अंजाम दिया।
लंबे समय से अपराध की दुनिया से जुड़े हैं आरोपी
हत्या व डकैती के आरोपी दोनों भाई बिंटू व अरुण लंबे समय से अपराध की दुनिया से जुड़े हैं। आरोपी बिंटू पर दिल्ली के महरौली में छह मुकदमे दर्ज हैं। बिंटू बीती 29 दिसंबर को ही दिल्ली की तिहाड़ जेल से छूटकर आया था। उसके भाई अरुण पर भी मथुरा के थानों में मुकदमे दर्ज है। वह भी बीती 25 अक्टूबर को 13 माह ही जेल काटकर आया है। जीआरपी थानों में भी आरोपियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं।
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