पलवल। पूर्वांचल जनकल्याण समिति के तत्वावधान में जिले में चार दिवसीय छठ महोत्सव सोमवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। पूर्वांचल के लोगों ने छठ महोत्सव के तहत नहाय-खाय का व्रत रखा। यह निर्जला व्रत तीन दिन तक चलेगा। 11 नवंबर को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाएगा। व्रतधारी महिलाओं ने सोमवार को घरों में परंपरागत तरीके से पूजा की तथा प्रसाद बनाया। पूर्वांचल के लोगों में छठ महोत्सव को लेकर बेहद उत्साह नजर आ रहा है।
बनाया गया कद्दू-भात
नहाय खाय का व्रत रखने के दौरान विशेष पूजा की गई तथा बिना मसाले के कद्दू की सब्जी व भात बनाया गया तथा उसका सेवन किया गया। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत से तन-मन निर्मल रहता है। पर्व के पहले दिन महिलाओं ने स्नान किया तथा नाखून काटकर शरीर को पूरी तरह से स्वच्छ किया। सुबह से ही पूर्वांचल के लोग इस व्रत की तैयारियों में जुट गए थे। छठ महोत्सव को लेकर विशेष तैयारियां की गईं तथा पूजन के लिए खरीद की गईं।
आज रहेगा निर्जला व्रत
इस महोत्सव के तहत 9 नवंबर को खरना होगा। इस दिन निर्जला व्रत होगा। इसे ज्ञान पंचमी भी कहा जाता है। मंगलवार को इस व्रत के तहत सूखी रोटी और गुड़ की खीर व केला अर्पित कर छठ मइया की पूजा प्रारंभ होगी। तीन दिन तक व्रती महिलाएं कठिन साधना करेंगी। बिस्तर के बजाय चटाई पर सोया जाएगा। व्रती महिलाएं उसी कमरे में सोएंगी जहां अर्घ्य के पकवान बनाए जाते हैं। स्वच्छता का बहुत ध्यान रखा जाएगा। 10 नवंबर को तीसरे दिन सायंकालीन अर्घ्य दिया जाएगा।
अगवानपुर घाट तैयार
छठ पर होने वाली सामूहिक पूजा के लिए अगवानपुर स्थित घाट अब पूरी तरह तैयार है। घाट रंग-रोगन होने के बाद काफी चमक रहा है। मंगलवार को घाट में पानी भरा जाएगा। यहां मेला लगेगा तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे व बुधवार को डूबते सूर्य को अर्ध्य दिया जाएगा। बृहस्पतिवार को भंडारा आयोजित किया जाएगा। समिति के प्रधान विजय पटेल ने बताया कि छठ महोत्सव को लेकर पूर्वांचल के लोगों में बेहद उत्साह है। 9 नवंबर को खरना होगा तथा 10 दिसंबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। महोत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।