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Palwal News: जिले में प्रदूषण का स्तर बिगाड़ रहा लोगों का स्वास्थ्य

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कैप्शन: 4- पलवल में पुल निर्माण में लगी चिमनियाें से उठ रहा धुआं
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कैप्शन: 5- शहर में पड़ी गंदगी बढ़ा रही प्रदूषण
कैपशन: 6- पेड़ों पर छायी धूल बढ़ा रही प्रदूषण
निर्माण कार्य में लगीं चिमनियाें से उठ रहा धुआं फैला रहा प्रदूषण
गंदगी, कूड़ा व पराली जलाने तथा वाहनों से भी बढ़ रहा प्रदूषण
संवाद न्यूज एजेंसी

पलवल। जिले में प्रदूषण का स्तर एक ही दिन में 349 पर पहुंच गया है। एक साथ इतनी अधिक बढ़ोतरी से लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ने का खतरा भी बढ़ गया है। बृहस्पतिवार को जिले में प्रदूषण का स्तर पीएम2- 278 था, जबकि शुक्रवार देर रात को ही यह स्तर बढ़कर 349 पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही हालात रहे तो दिवाली तक यह 500 के पार पहुंच जाएगा। ऐसे में सांस व अस्थमा रोगियों को बचाव करने की जरूरत है। हवा की गुणवत्ता बेहद खराब है। इस हवा में सांस लेना मानो पांच सिगरेट पीने के बराबर है। प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य व्यक्ति के भी फेफड़ों को खराब कर सकता है।
प्रदूषण नियंंत्रण विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जिले में पीएम2- का स्तर 377 तथा पीएम10 का स्तर 449 नोट किया गया। प्रदूषण अधिक होने के कारण हवा में धूल के कण अधिक हो गए हैं। हवा में धूल के कण इतने अधिक हैं कि पेड़ों की पत्तियों पर भी धूल दिखाई दे रही है। ऐसे में हल्की सी हवा चलने पर पेड़ हिलते ही वायु में प्रदूषण बढ़ जाता है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण कूड़ा व पराली जलाना है। उसके अलावा जिले में चल रहे निर्माण कार्य भी प्रदूषण को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। जिले में सर्वाधिक प्रदूषण सरकार की तरफ से किए जा रहे निर्माण कार्य फैलाने का काम कर रहे हैं। सरकारी स्तर पर हो रहे निर्माण कार्य में लगी मशीनें, उपकरण तथा सड़क निर्माण के लिए तारकोर व रोड मिलाने के लिए लगी चिमनियां इतना अधिक धुआं उगल रही हैं कि आसपास कई बार तो अंंधेरा सा नजर आने लगता है। आसमान भी पूरी तरह से उस काले धुएं के कारण पूरी तरह से काला नजर आने लगता है। कई बार तो धुआं इतना अधिक हो जाता है कि दिन के समय भी शाम नजर आने लगती है।
जिले में वाहन भी प्रदूषण स्तर को बढ़ाने का काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जाम लगने पर भी वाहन चालक वाहनों के इंजन को बंद नहीं करते हैं। जिससे वहां आसपास प्रदूषण फैलता है। रेड लाइट पर तथा जाम लगने पर वाहनों को बंद कर देना चाहिए, ताकि प्रदूषण का स्तर कम हो। इसके अलावा डीजल वाले तिपहिया अधिक प्रदूषण फैला रहे हैं। जिले में सड़कों पर तंदूरी नान बेचने वालों द्वारा लगाए हुए तंदूर भी प्रदूषण बढ़ने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। तंदूर सुबह से ही शुरू हो जाते हैं और देर शाम तक चलते हैं। ऐसे में वहां आसपास प्रदूषण का स्तर बढ़ा रहता है।
जिले में सड़कों के किनारे व रिहायशी क्षेत्रों में पड़ी गंदगी भी प्रदूषण स्तर के बढ़ने में काफी हद तक जिम्मेदार है। क्योंकि गंदगी के ढेर कई-कई दिनों तक नहीं उठाए जाते हैं। इससे वहां बदबू उठने लगती है। जिससे प्रदूषण फैलता है। साथ ही गंदगी में लोगों द्वारा आग लगाने से प्रदूषण का स्तर और अधिक बढ़ जाता है।
डॉक्टरों ने सुबह सैर न करने की दी सलाह
डॉक्टरों ने सुबह व शाम के समय सैर करने वाले लोगों को इससे बचने की सलाह दी है। डॉक्टर धर्म प्रकाश आर्य का कहना है कि प्रदूषण का स्तर अधिक होने के कारण सैर करने से बचना चाहिए। क्योंकि सैर करते समय सुबह के समय सांस लेने से दूषित हवा सांस के द्वारा फेफड़ों में चली जाती है। इससे सांस की समस्या बन सकती है। सैर सुबह दिन निकलने के बाद करनी चाहिए। सांस व अस्थमा के मरीजों को तथा बुजुर्गों को तो सैर करने से बिल्कुल बचना चाहिए।
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जिला उपायुक्त नेहा सिंह ने अधिकारियों से कहा है कि लगातार बढ़ रहे प्रदूषण पर नियंत्रण के इंतजाम किए जाएं। प्रदूषण न फैले इसके लिए लोगों को जागरूक किया जाए। निर्माण सामग्री वालों को निर्देश दिए जाएं कि वे पानी का छिड़काव करें तथा निर्माण सामग्री को ढककर रखें। कूड़ा व पराली जलाने वालों पर विशेष निगरानी की जाए।
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