होडल। यूक्रेन से जिले के 12 बच्चे तो सकुशल लौट आए हैं, लेकिन अब भी करीब तीन से चार बच्चे वहीं फंसे हुए हैं। उनमें से सौंदहद गांव का कृष्ण रोमानिया बार्डर पर फंसा हुआ है। सोमवार को उसके द्वारा अपने पिता के पास व्हाट्सअप पर वीडियो भेजकर उसे जल्द से जल्द घर बुलाने की मांग की है। उसका कहना था कि बार्डर पर उसके जैसे 200 से अधिक भारतीय छात्र फंसे हुए हैं। काफी छात्र अब भी बंकरों में माइनस तीन डिग्री से नीचे के तापमान में रहने को मजबूर हैं। अब यहां खाने-पीने की भी समस्या बनने लगी है।
वीडियो व ऑडियो जारी कर भारत सरकार से जल्द से जल्द निकाले जाने की अपील की है। यूक्रेन की राजधानी कीव में गांव सौंदहद का रहने वाला छात्र कृष्णकुमार बिजनेस मैनेजमेंट में पढ़ाई कर रहा है। कृष्णकुमार ने बताया कि उसे भारतीय दूतावास की ओर से बॉर्डर पर पहुंचने के लिए कहा गया था। वह और उसके साथी रविवार को ही बार्डर पर पहुंच गए। कई घंटों से वहां इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उन्हें लेने के लिए कोई भी नहीं पहुंचा। छात्र ने बताया कि वह और उसके साथ अन्य सैकड़ों की संख्या में छात्र बंकर में माइनस सेल्सियस के तापमान में रहने को मजबूर हैं। यहां से आगे जाने की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने बताया कि यूक्रेन-रोमानिया के बॉर्डर पर भारत के हजारों छात्र-छात्राएं फंसे हुए हैं। पिछले लगभग 30 घंटे से रोमानिया में प्रवेश नहीं मिल रहा है और यहां खाने पीने की कोई व्यवस्था नहीं है। जिसे लेकर छात्रों में रोष बढ़ता जा रहा है।
साधन न होने पर पैदल ही जा रहे छात्र
कृष्ण के साथ और दो-तीन छात्रों ने बताया कि बहुत से लोगों ने तो बार्डर से एयरपोर्ट के लिए पैदल निकलना शुरू कर दिया है। सरकार छात्रों को लाने का काम कर रही है, लेकिन बहुत से छात्र अब भी लौटने के इंतजार में हैं। बॉर्डर से बुखारेस्ट एयरपोर्ट पहुंचाने के लिए कैब वाले भी मुंह मांगी कीमत वसूल रहे हैं। छात्रों के पास खाने तक के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं। मुसीबत ये भी है कि फोन का नेटवर्क और बैटरी दोनों ही साथ नहीं दे रहे हैं।