पलवल। केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर एक साल से शांतिपूर्ण चल रहा किसान आंदोलन बुधवार को जारी रहा। बुधवार को धरने पर किसान मसीहा चौ. छोटूराम की जयंती मनाई गई। किसानों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर आंदोलन को अंतिम परिणाम तक पहुंचाने की शपथ ली। धरने में किसान संघर्ष समिति पलवल ने जिले में कार्यरत सभी किसानों, जनसंगठनों, छात्रों, युवाओं, महिलाओं, वकीलों, व्यापारियों व तमाम बुद्धिजीवियों से 26 नवंबर को किसान आंदोलन के एक साल पूरा होने पर होने वाले प्रदर्शन में भाग लेने की अपील की।
राष्ट्रीय एकता विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती व भारतीय किसान यूनियन के नेता रतनसिंह सोरौत ने कहा कि अन्नदाताओं ने ऐतिहासिक आंदोलन को शिखर तक पहुंचाया है, जो वास्तव में लोकतंत्र की जीत है। यह जीत किसी के अहंकार व घमंड की जीत नहीं है, बल्कि लाखों उपेक्षित भारतीयों के जीवन और आजीविका की बात है। किसान को सड़कों पर बैठने का कोई शौक नहीं है। वह भी जल्द से जल्द अपने घर लौट जाना चाहता है, जिससे वह अपने घर परिवार व खेतीबाड़ी को संभाल सके, लेकिन प्रधानमंत्री के संबोधन में किसानों की बड़ी मांगों पर ठोस घोषणा न होने से किसानों को निराशा हुई है। किसानों ने तीन कृषि कानूनों को निरस्त होने की उम्मीद के साथ अपनी मेहनत के दाम की कानूनी गारंटी की पूरी होने की उम्मीद भी थी।
किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान व उदय सिंह सरपंच ने कहा कि सरकार के मंत्रियों ने प्रधानमंत्री की घोषणा का स्वागत करने के बावजूद तीनों कृषि कानूनों की प्रशंसा करने का सिलसिला बंद नहीं किया है। यह अचरज की बात नहीं है कि जिन कानूनों को किसान आंदोलन के दबाव में सरकार ने रद्द करने का एलान किया है, उन्हीं कानूनों को सरकार में बैठे लोग अब भी किसानों और देश के लिए बहुत अच्छा साबित करने में लगे हुए हैं।
धरने को किसान नेता महेंद्र सिंह सरपंच, धर्मचंद, सोहनपाल चौहान, रमेशचंद गोड़ौता, जयनारायण पंच, राजेंद्र बैंसला, रघुबीर सिंह, बीधू सिंह, धनीराम थानेदार, नंदराम सरपंच, रणबीर भंगूरी, महेश गहलब, पंडित कल्लू गहलब, हरिया व धनबीर फिरोजपुर ने भी संबोधित किया।