स्कूल खुलने के बाद कक्षा में पढ़ाई करते विद्यार्थी। संवाद
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कोरोना की तीसरी लहर के बीच बंद चल रहे शिक्षण संस्थान आखिर मंगलवार को एक माह बाद फिर से खुल गए हैं। कोरोना नियमों का पालन करते हुए जहां विद्यार्थी मास्क लगाकर व अपने अभिभावकों से अनुमति पत्र लेकर स्कूल पहुंचे, वहीं उनको सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए कक्षा में बैठाया गया। कुछ स्कूलों में विद्यार्थियों को टीकाकरण प्रमाणपत्र दिखाने के बाद ही स्कूल में प्रवेश दिया गया। एक माह बाद स्कूल खुलने से विद्यार्थियों में उत्साह देखा गया। सरकार के निर्देशानुसार स्कूलों में 10 से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को ही बुलाया गया, जबकि कॉलेज में 50 प्रतिशत विद्यार्थियों को बुलाया गया। हालांकि पहले दिन कॉलेज में कम ही विद्यार्थी पहुंचे, मगर स्कूलों में विशेषकर निजी स्कूलों में शत-प्रतिशत विद्यार्थी पहुंचे।
बात दें कि कोरोना की तीसरी लहर के चलते सरकार ने जनवरी के पहले सप्ताह में ही सभी शिक्षण संस्थानों को बंद करने का आदेश जारी किया था। कोरोना संक्रमण का प्रसार धीरे-धीरे कम होने लगा तो निजी स्कूल संचालकों ने सरकार से स्कूल खोलने की मांग करने लगे। वहीं 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों का वैक्सीनेशन भी निर्धारित लक्ष्य से अधिक किया गया। बोर्ड की परीक्षा नजदीक व कोरोना का प्रसार कम होने पर सरकार ने 1 फरवरी से सभी शिक्षण संस्थानों को खोलने का निर्णय लिया था।
कोरोना का प्रसार कम होने पर अन्य कक्षाओं के शुरू होने की संभावना
सरकार ने फिलहाल 10वीं से 12वीं कक्षा तक के ही विद्यार्थियों को स्कूल बुलाने के निर्देश दिए हैं, मगर संभावना है कि आने वाले दिनों में कोरोना संक्रमण का प्रसार कम होने पर 6वीं से 9वीं कक्षा के विद्यार्थियों को भी बुलाने का आदेश जारी कर दिया जाए। फिलहाल सरकार ने अभी 10वीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को ही बुलाने के आदेश जारी किए हैं।
कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए विद्यार्थी स्कूल पहुंचे। विभाग के आदेशानुसार विद्यार्थियों को अभिभावकों के सहमति पत्र व टीकाकरण प्रमाणपत्र दिखाने के बाद ही स्कूलों में प्रवेश दिया गया। स्कूल खुलने से विद्यार्थी उत्साह के साथ पहुंचे। सुुनील दत्त यादव, जिला शिक्षा अधिकारी, नारनौल।