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प्रकाशोत्सव में भाग लेने पानीपत पहुंची संगत

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पानीपत में आयोजित गुरु तेग बहादुर के 400वें प्रकाशोत्सव में भाग लेने पहुंची जिले की संगत ने श्रद्धा भाव से गुरुवाणी सुनी, लंगर छका तथा प्रदर्शनी का अवलोकन किया। कार्यक्रम स्थल पर लगी प्रदर्शनी में स्कूल कॉलेज के विद्यार्थियों ने गुरु नानक देव से लेकर बाबा बंदा बहादुर तक के इतिहास को देखा।
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सूचना जनसंपर्क एवं भाषा विभाग की ओर से लगाई गई इस प्रदर्शनी में सिख गुरुओं के त्याग व बलिदान से जुड़ी गाथा को 100 से अधिक डिस्प्ले पैनल के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। प्रकाशोत्सव कार्यक्रम स्थल पर लगी प्रर्दशनी में सन 1621 से लेकर 1675 तक गुरु नानक देव की पूरी प्रकाश यात्रा को दर्शाया गया था।
नारनौल महिला कॉलेज की छात्रा कोमल ने कहा कि सिख धर्म ने देश को महान गुरु दिए हैं जिन्होंने समाज में प्रेम, समता और भाईचारे की कड़ियों को मजबूत किया है। यहां आकर हमें ऐसे महान गुरुओं के बारे में जानने को मिला यह सरकार का बहुत ही अच्छा प्रयास है।
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छात्रा आशा ने बताया कि गुरु का यह बलिदान केवल धर्म पालन के लिए नहीं अपितु समस्त मानवीय सांस्कृतिक विरासत की खातिर था। छात्रा सोनिया ने बताया कि प्रदेशवासियों का सौभाग्य है कि राज्य की धरा पर गुरु तेग बहादुर के पावन चरण कई बार पड़े। इस प्रदर्शनी में गुरु तेग बहादुर से जुड़ी सभी बातें बताई गई है। इस तरह की प्रदर्शनी से इतिहास की जानकारी लेने का मौका मिलता है। छात्रा अनीता ने बताया कि लोगों को गुरु तेग बहादुर के त्यागपूर्ण जीवन, कृत्यों और शिक्षाओं से अवगत करवाने के लिए इस तरह की प्रदर्शनी सहायक सिद्ध होती है। छात्रा आरती ने बताया हमें गुरु तेग बहादुर की शिक्षाओं का अनुपालन करते हुए उनके दिखाए मार्ग पर चलना चाहिए। यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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