फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नियम 134 ए खत्म करने से निजी स्कूल संचालक खुश तो अभिभावक मायूस

विज्ञापन
विज्ञापन
सरकार ने शिक्षा नियम 134ए को खत्म कर नए शिक्षा सत्र में निजी स्कूलों में दाखिला लेने के इच्छुक विद्यार्थियों को झटका दिया है। इससे 134ए के तहत जिले के विभिन्न निजी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। क्योंकि अब वे अपने बच्चों को निजी स्कूलों में कैसे पढ़ा सकेंगे। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो बच्चे नियम 134ए के तहत निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं वे पूर्व की भांति पढ़ते रहेंगे। वहीं आगे शिक्षा का अधिकार के तहत बच्चों का स्कूलों में निशुल्क दाखिला करने की बात कही है। मगर शिक्षा का अधिकार के तहत बच्चों को उस स्थिति में निजी स्कूलों में दाखिला मिलेगा जब उनके नजदीक कोई सरकारी स्कूल नहीं होगा या फिर उसमें सीटें भर गई होंगी। वहीं निजी स्कूल संचालकों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।
विज्ञापन

बता दें कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को निजी स्कूलों में निशुल्क पढ़ाई करवाने के उद्देश्य से वर्ष 2003 में कांग्रेस सरकार में नियम 134ए बनाया था। इसते तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के दाखिले के लिए निजी स्कूलों में 10 प्रतिशत सीटें निर्धारित की थीं। उक्त नियम के तहत गत शिक्षा सत्र में जिले से 1200 के करीब विद्यार्थियों ने दाखिले के लिए आवेदन किया था। जिनमें से 1100 से अधिक विद्यार्थियों को दाखिला मिल चुका है, जबकि कुछ बच्चों के दस्तावेजों में कमी के कारण उनका आवेदन निरस्त कर दिया गया था, मगर अब सरकार ने नियम 134ए को खत्म करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस प्रकार अब नए शिक्षा सत्र में नियम 134ए के तहत निजी स्कूलों में गरीब घर के बच्चों का दाखिला नहीं किया जाएगा
सरकार के फैसले से जहां निजी स्कूल संचालक खुश हैं तो वहीं आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लोगों और बच्चों में निराशा पाई जा रही है। क्योंकि अब उन्हें निजी स्कूलों में निशुल्क दाखिला नहीं मिल पाएगा। अभिभावकों को अब बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है। हालांकि सरकार नए सत्र में शिक्षा का अधिकार के तहत दाखिला देने की बात कह रही है, पर उक्त नियम में सीधे निजी स्कूलों में दाखिले का प्रावधान नहीं किया गया है।
विज्ञापन

क्या है शिक्षा का अधिकार
शिक्षा का अधिकार के तहत भी विद्यार्थियों को निजी स्कूलों में निशुल्क दाखिला व पढ़ाई का प्रावधान किया गया है, लेकिन इसमें विद्यार्थी के निजी स्कूलों में दूसरी से 12वीं तक सीधे दाखिला लेने का नियम नहीं है। नियमानुसार बच्चों को एक किमी के दायरे में स्थित सरकारी स्कूल में पहली कक्षा में दाखिला दिलाया जाता है। अगर इस दायरे में कोई सरकारी स्कूल नहीं है तो उन्हें पास के ही निजी स्कूल में दाखिला देने का प्रावधान है। शिक्षा का अधिकार में निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें निर्धारित की गई है। जबकि नियम 134ए के तहत 10 प्रतिशत सीटें निर्धारित थीं।
सरकार ने नियम 134ए को खत्म कर एक अच्छा फैसला लिया है। पूर्व की सरकार ने एक गलत निर्णय लिया था। जिसे उक्त सरकार ने खत्म करके सही काम किया है। नियम 134ए का पात्र कम अपात्र बच्चे अधिक लाभ लेने लगे थे। इसको लेकर उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा था। अब भी विद्यार्थी शिक्षा का अधिकार के तहत नियमानुसार निजी स्कूलों में दाखिला ले सकते हैं। -अनिल कौशिक, जिला प्रधान, प्रोग्रेसिव प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन।
नए शिक्षा सत्र से नियम 134ए के तहत दाखिले नहीं होंगे। अब शिक्षा का अधिकार नियम के तहत विद्यार्थियों को निजी स्कूलों में दाखिले दिया जाएगा। शिक्षा का अधिकार आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों के लिए ही बनाया गया है। इसका बच्चों को लाभ मिलेगा। शिक्षा का अधिकार के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें ऐसे बच्चों के लिए निर्धारित की गई है। -सुनील दत्त यादव, जिला शिक्षा अधिकारी, महेंद्रगढ़।
अखिल भारतीय शिक्षा बचाओ समिति ने नियम 134-ए खत्म करने पर नाराज
अखिल भारतीय शिक्षा बचाओ समिति के जिला सचिव विजेंद्र सिंह ने हरियाणा सरकार द्वारा नियम 134ए को खत्म किए जाने पर सरकार की कड़ी आलोचना की है।
उन्होेंने कहा कि सरकार के इस फैसले से गरीब बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में प्रतिकूल हालातों तथा अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। कोरोना व लॉकडाउन के कारण प्रदेश में गरीब जनता की आर्थिक हालत पहले ही बदतर है। इस फैसले ने सरकार के गरीब व शिक्षा विरोधी चेहरे को बेनकाब कर दिया है। कल्याणकारी राज्य में सरकार का दायित्व होता है कि जनता को अच्छी चिकित्सा व शिक्षा मुहैया करवाए न कि अमीरों को लूट की खुली छूट देना। उन्होंने सरकार से मांग की तुरंत फैसले को वापस लेकर नियम 134ए को फिर से बहाल किया जाए। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें