पर्वतीय क्षेत्रों पर भारी बर्फबारी की वजह से मैदानी भागों का न्यूनतम तापमान में गिरावट आई है। जिसकी वजह से गुलाबी ठंड का एहसास बढ़ गया है। जिससे नारनौल का न्यूनतम तापमान 11.2 डिग्री व अधिकतम तापमान 27 डिग्री दर्ज किया गया। दीपावली और गोवर्धन पूजा पर हुई पटाखों और आतिशबाजी से वायु प्रदूषण का स्तर और भी बढ़ गया है जिसकी वजह से आम आदमी को सांस लेने में भी तकलीफ हो रही है।
राजकीय महाविद्यालय नारनौल के पर्यावरण क्लब के नोडल अधिकारी डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि इस बार ला-नीनो मौसमी सिस्टम की सक्रियता की वजह, मानसून की वापसी के बाद भी बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में अधिक संख्या में लो प्रेशर एरिया बनना और बाद में डिप डिप्रेशन लो एरिया में तब्दील होना है। वहीं समय से पहले ही अक्तूबर के शुरुआत से वेस्टर्न डिस्टरबेंस प्रभावी होना हैं जो दिसंबर और जनवरी के महीने में सक्रिय होते थे। इस बार ला-नीनो की सक्रियता से मैदानी इलाकों में ज्यादा कड़कड़ाती ठंड पड़ेगी। शनिवार को नारनौल का न्यूनतम तापमान 11.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आने वाले दिनों में और अधिक बर्फबारी ओलावृष्टि व हिमपात होने की संभावनाएं हैं। इसकी वजह से कोहरा भी बहुत ज्यादा बढ़ेगा। 6 नवंबर की दोपहर से उत्तर पश्चिम दिशा से तेज हवाएं चलने की उम्मीद है। जिसके प्रभाव से वायु प्रदूषण से काफी राहत मिल सकती है। कड़ाके की सर्दी हमेशा अधिक वायु प्रदूषण का कारण नहीं बन पाती है। क्योंकि बीच बीच में पश्चिमी विक्षोभ के आने के कारण उत्तर भारत में वर्षा होती है जो प्रदूषण को कम करती है। पश्चिमी विक्षोभ के आगे बढ़ जाने के बाद तेज हवाएं चलती है जिससे प्रदूषण में राहत मिलती है।