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गाजर की जैविक खेती से कर रहे लाखों की कमाई

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गांव भड़फ में खेत में गाजर दिखाते किसान रवि कुमार व अजय। संवाद - फोटो : Narnol
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मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़कर गांव भड़फ निवासी रवि कुमार जैविक तरीके से गाजर की खेती कर हर वर्ष दो से तीन लाख रुपये प्रति एकड़ कमा रहे हैं। इस सीजन में भी अभी तक रवि कुमार एक लाख रुपये की गाजर बेच चुके हैं। क्षेत्र व आसपास में रवि कुमार द्वारा उगाई गई लाल और काली गाजर की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते उसे कहीं दूर जाने की आवश्यकता नहीं होती है। रेवाड़ी-महेंद्रगढ़ रोड पर बिना गए बिक्री केंद्र में सुबह-शाम लोगों की भीड़ लगी रहती है।
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प्राकृतिक एवं जैविक खेती को दे रहे बढ़ावा
रवि कुमार गाजर के साथ अन्य सब्जियां भी उगा रहे हैं। साथ ही क्षेत्र के किसानों को निशुल्क जैविक खेती का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। खाद से लेकर कीटनाशक तक सभी देशी गाय के गोबर से तैयार करते हैं। शून्य बजट से प्राकृतिक खेती करते हैं, जिसमें जीवामृत, घना मृत जैसे जैविक उर्वरक गाय के गोबर और गोमूत्र से तैयार करते हैं। इसमें अलग से कोई खर्च नहीं करना पड़ता है। इन खादों के प्रयोग से पोषक तत्व पौधों को काफी समय तक मिलता है। इन खादों के प्रयोग से दूसरे फसल को भी लाभ मिलता है।
देसी खाद के प्रयोग ने बढ़ाया उत्पादन
सबसे पहले खेत में गोबर की खाद डालकर दो से तीन बार उसकी जुताई की। उसके बाद में बेड (मेड़ानी) बनाकर उन पर एक तरफ लाल गाजर व एक तरफ देसी काली गाजर के बीज का छिड़काव किया। दो-तीन साल के अनुभव से लगातार उत्पादन भी बढ़ता गया। गाजर की अच्छी पैदावार के लिए अगस्त के आखिरी और सितंबर के पहले सप्ताह में बिजाई कर दी थी। रिजबेड वेजिटेबल प्लांटर मशीन से बुआई की गई। इस मशीन की मदद से बुवाई के साथ-साथ मेड़ बनाया जाता है। इस तरह फसल की बुवाई करना काफी आसान हो जाता है। खेत तैयार करते समय गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर 20 से 25 टन डालनी चाहिए।
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100 क्विंटल तक पहुंचा उत्पादन
रवि कुमार ने बताया कि वह प्रति एकड़ 100 क्विंटल तक गाजर का उत्पादन कर रहा है। उनका मानना है कि प्राकृतिक एवं जैविक रूप से खेती कर प्रति एकड़ यह उत्पाद 130 क्विंटल तक पहुंचाया जा सकता है।
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